Jharkhand News: नगर विकास विभाग झारखंड ने आदेश जारी कर स्पष्ट किया है कि नगर निकाय क्षेत्र में आने वाले सभी केंद्रीय प्रतिष्ठानों और सार्वजनिक उपक्रमों से सेवा न मिलने की स्थिति में भी 35 प्रतिशत शुल्क अनिवार्य रूप से लिया जाएगा. यदि नगर निकाय संबंधित संस्थान को सेवाएं प्रदान कर रहा है तो यह शुल्क अधिकतम 66 प्रतिशत तक वसूला जाएगा. विभाग ने सभी नगर निकायों को निर्देश दिया है कि अपने क्षेत्र में मौजूद सभी प्रकार की होल्डिंग्स का सही तरीके से असेसमेंट सुनिश्चित किया जाए और संपत्तियों के वास्तविक उपयोग के आधार पर कर भुगतान की जांच की जाए. इसी प्रक्रिया को प्रभावी बनाने के लिए जीआईएस आधारित सॉफ्टवेयर विकसित किया जा रहा है जिससे सर्वे और डेटा रेकॉर्डिंग का पूरा काम डिजिटल और सटीक होगा.
नगर निकायों को इस सॉफ्टवेयर के उपयोग का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा. विभाग ने कहा है कि नए नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कार्रवाई शुरू की जाए जिससे राजस्व संग्रह में पारदर्शिता और सटीकता कायम की जा सके.
सरकार के इस कदम का मकसद राजस्व संग्रह को व्यवस्थित करना और नगर निकायों की आर्थिक स्थिति मजबूत करना है. डिजिटल असेसमेंट प्रक्रिया से कर निर्धारण में अनियमितताओं पर रोक लगेगी और केंद्रीय प्रतिष्ठानों से मिलने वाला राजस्व बढ़ सकता है. इसके साथ ही नगर निकायों पर यह जिम्मेदारी भी बढ़ेगी कि वे सर्वे और सॉफ्टवेयर संचालन में दक्षता विकसित करें.