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  • 2025-11-17

Jharkhand News: आम्रपाली-चंद्रगुप्त क्षेत्र के GM की चिट्ठी के बाद टंडवा में शुरू हुई अवैध वसूली, ट्रांसपोर्टर हड़ताल पर

Jharkhand News: टंडवा में ट्रांसपोर्टरों ने अवैध वसूली के विरोध में हड़ताल कर दी है. हाईवा मालिकों ने काम बंद कर दिया है और करीब पंद्रह सौ हाईवा वाहनों के चक्के पांच दिनों से थमे हुए हैं. कोयले का उठाव पूरी तरह ठप है. ट्रांसपोर्टरों का आरोप है कि टंडवा पुलिस प्रति टन पंद्रह रुपये की अवैध वसूली कर रही है. इस वसूली की शुरुआत अगस्त महीने में हुई थी और इसकी जानकारी चतरा से लेकर रांची के वरिष्ठ अधिकारियों तक थी. बताया जा रहा है कि अवैध वसूली से प्राप्त राशि कई स्तरों तक पहुंचती रही है.

सूत्रों के अनुसार सीसीएल के आम्रपाली-चंद्रगुप्त क्षेत्र के महाप्रबंधक ने 24 अगस्त 2025 को एक पत्र जारी किया था. यह पत्र क्षेत्रीय विक्रय प्रबंधक और प्रेषण अधिकारी को संबोधित था तथा इसकी प्रति सीसीएल मुख्यालय, आम्रपाली परियोजना पदाधिकारी और टंडवा थाना पुलिस को भेजी गई थी. पत्र में लिखा गया था कि हाल की आपराधिक घटनाओं को देखते हुए डीओ होल्डर के लिफ्टर और ट्रांसपोर्टर का पुलिस सत्यापन आवश्यक है. सत्यापन के बाद ही कोयला उठाव की अनुमति दी जाएगी.



इस आदेश के बाद लिफ्टर और ट्रांसपोर्टरों के लिए थाना पहुंचना अनिवार्य हो गया. विरोध की शुरुआती कोशिशें भी हुईं, लेकिन दबाव इतना अधिक था कि ट्रांसपोर्टरों को झुकना पड़ा. बताया जाता है कि दबाव बनाने वालों में उच्च अधिकारी और चतरा पुलिस के वरिष्ठ पदाधिकारी भी शामिल थे. इसके बाद प्रति टन 15 रुपये की वसूली तय कर दी गई.

टंडवा और पिपरवार क्षेत्र से हर महीने लगभग पांच लाख टन कोयला उठाव होता है. ऐसे में यह वसूली महीने में 75 लाख रुपये से अधिक पहुंच जाती है. इसी कारण टंडवा पिपरवार थाना को चतरा जिले का सबसे लाभदायक थाना माना जाने लगा है.

कोयला बेल्ट में अवैध वसूली कोई नई बात नहीं है, लेकिन इस मामले में खास बात यह है कि इसकी शुरुआत एक आधिकारिक पत्र के बाद हुई, जिसने पुलिस सत्यापन को अनिवार्य बना दिया. इस प्रक्रिया का दुरुपयोग कर अवैध पैसे की व्यवस्था खड़ी की गई. ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल से यह स्पष्ट होता है कि स्थिति अब नियंत्रण से बाहर होती जा रही है. 1500 वाहनों का रुकना कोयला सप्लाई और उद्योगों की गतिविधियों पर व्यापक असर डाल सकता है. यह मामला दिखाता है कि प्रशासनिक आदेश अगर निगरानी और पारदर्शिता के बिना जारी हों तो वे सीधे तौर पर भ्रष्टाचार को जन्म दे सकते हैं. इस पूरी प्रणाली की जांच और जवाबदेही तय करना अब अनिवार्य हो गया है.
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