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  • 2025-11-07

Jharkhand News: पूर्व रांची डीसी महिमापत रे के परिजनों के नाम खरीदी गयी दो करोड़ की जमीन, ACB ने शुरू की जांच

Jharkhand News: पूर्व रांची उपायुक्त राय महिमापत रे के परिजनों और रिश्तेदारों के नाम पर दो करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की दो एकड़ से ज्यादा जमीन खरीदी गयी थी. इस संबंध में वर्ष 2020 में आयकर विभाग को शिकायत की गयी थी. शिकायत में आरोप लगाया गया था कि तत्कालीन उपायुक्त ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों के नाम पर जमीन खरीदी है.

आयकर विभाग ने प्रारंभिक जांच के बाद इस शिकायत को गंभीर पाया और राज्य सरकार को आगे की कार्रवाई करने की अनुशंसा की. इसके बाद एसीबी ने राज्य सरकार की अनुमति मिलने के बाद प्रारंभिक जांच दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है.

शिकायत के अनुसार, जमीन की खरीद वर्ष 2019 से 2020 के बीच नामकुम अंचल के कुटियातु मौजा और रांची के तुपुदाना मौजा में की गयी थी. खरीद दो निजी संस्थाओं के माध्यम से हुई थी. इनमें कुटियातु मौजा की जमीन M/S Pranami Builders Pvt. Ltd से और तुपुदाना की जमीन M/S Srijan Infra से खरीदी गयी.

Pranami Builders की ओर से निदेशक विजय अग्रवाल और Srijan Infra की ओर से नितेश शाहदेव ने संपत्ति की बिक्री की थी. दस्तावेजों के अनुसार, नामकुम अंचल की जमीन पूर्व उपायुक्त के बच्चों और अन्य रिश्तेदारों के नाम पर खरीदी गयी थी. जमीन की हर रजिस्ट्री में लगभग 10 डिसमिल भूमि दर्ज है और प्रत्येक सेल डीड के लिए 11.40 लाख रुपये का भुगतान किया गया था.

सभी जमीनें खाता संख्या 62 और प्लॉट नंबर 1593 से संबंधित बताई जा रही हैं. दस्तावेजों में कुमकुम रे ने अभिभावक के रूप में खरीद का प्रतिनिधित्व किया. वहीं, तुपुदाना की जमीन के लिए कुमकुम रे के नाम पर मेसर्स Srijan Infra से एक फ्लैट खरीदा गया, जिसकी कीमत 49.57 लाख रुपये बताई गयी है.

इस पूरे लेनदेन की कुल कीमत दो करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है. फिलहाल एसीबी इस मामले में जमीन खरीद से जुड़ी रकम के स्रोत, भुगतान के तरीकों और लाभार्थियों की भूमिका की जांच कर रही है.

पूर्व रांची डीसी के परिजनों के नाम पर की गयी जमीन खरीद पर उठे सवाल झारखंड की नौकरशाही में पारदर्शिता की स्थिति पर बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा करते हैं. अक्सर यह देखा गया है कि पद पर रहते हुए कई अधिकारी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हैं. इस मामले में भी शिकायत यह दर्शाती है कि सत्ता और संपत्ति के बीच की रेखा कितनी धुंधली हो चुकी है. अब जब एसीबी ने प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है, तो यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या जांच जमीन खरीद में संभावित भ्रष्टाचार की जड़ तक पहुंच पाती है या यह मामला भी अन्य संवेदनशील फाइलों की तरह धीरे-धीरे ठंडे बस्ते में चला जाएगा.
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