National News: सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में बढ़ती डॉग बाइट घटनाओं और सड़कों पर आवारा मवेशियों की वजह से हो रहे हादसों पर सख्त रुख अपनाया है. शुक्रवार को शीर्ष अदालत की तीन जजों की बेंच ने सभी राज्य सरकारों को निर्देश दिया है कि वे हाईवे, सड़कों और एक्सप्रेस-वे से आवारा कुत्तों और मवेशियों को तुरंत हटाएं. कोर्ट ने कहा कि इस आदेश का पालन सुनिश्चित किया जाए, वरना संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जाएगा.
इन परिसरों से हटाए जाएंगे कुत्ते
हालांकि कोर्ट का लिखित आदेश अभी जारी नहीं हुआ है, लेकिन मौखिक रूप से अदालत ने साफ कहा कि इस दिशा में सख्त कदम उठाना जरूरी है. कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे सरकारी और निजी परिसरों जैसे अस्पताल, शैक्षणिक संस्थान, सार्वजनिक खेल परिसर, रेलवे स्टेशन और बस डिपो की पहचान कर उन्हें इस तरह से घेरें कि आवारा कुत्ते अंदर प्रवेश न कर सकें.
अदालत ने यह भी कहा कि इन परिसरों से पहले से मौजूद आवारा कुत्तों को हटाकर उनकी नसबंदी कराई जाए और उन्हें निर्धारित डॉग शेल्टर में भेजा जाए. कोर्ट ने अधिकारियों को आदेश दिया कि इन परिसरों से हटाए गए कुत्तों को वापस उसी जगह पर न छोड़ा जाए क्योंकि इससे समस्या का समाधान नहीं होगा.
सुनवाई के दौरान कुछ वकीलों ने आदेश को लेकर चिंता जताई और संशोधन की मांग की लेकिन बेंच ने इस पर कोई राहत देने से इनकार कर दिया.
प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वे आवारा जानवरों को हटाएं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने स्वतः संज्ञान लेते हुए यह मामला उठाया. अदालत ने कहा कि यह स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वे इन जगहों से आवारा जानवरों को हटाएं और उन्हें एनिमल बर्थ कंट्रोल रूल्स के तहत प्रबंधित करें. कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि स्थानीय निकाय समय-समय पर इन परिसरों का निरीक्षण करें ताकि कुत्ते दोबारा वहां डेरा न डाल सकें.
सुप्रीम कोर्ट ने सड़कों और हाईवे पर घूमने वाले आवारा मवेशियों के खिलाफ भी निर्देश जारी किए हैं. अदालत ने कहा कि इन मवेशियों को सड़कों से हटाकर सुरक्षित स्थानों पर रखा जाए ताकि हादसों की संभावना को कम किया जा सके.
डॉग बाइट और रेबीज की घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता
इसी साल जुलाई में भी सुप्रीम कोर्ट ने डॉग बाइट और रेबीज की घटनाओं पर चिंता जताई थी. जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने उस समय दिल्ली-एनसीआर के सभी आवारा कुत्तों को शेल्टर होम में रखने का आदेश दिया था और आठ हफ्ते की समयसीमा तय की थी.
हालांकि इस आदेश का पशु अधिकार संगठनों ने विरोध किया था. पेटा इंडिया सहित कई संगठनों ने कहा था कि कुत्तों को हटाना न तो वैज्ञानिक उपाय है और न ही इससे स्थायी समाधान निकलेगा. उनका कहना था कि अगर प्रभावी नसबंदी कार्यक्रम पहले लागू किया गया होता तो आज यह समस्या नहीं होती.
बाद में तीन जजों की बेंच ने यह निर्देश दिया था कि जिन कुत्तों को पकड़ा गया है उन्हें उसी इलाके में छोड़ा जाए, बशर्ते उन्हें रेबीज़ न हो. वहीं, जिन कुत्तों में रेबीज़ की आशंका है उन्हें छोड़ा नहीं जाएगा. उस समय कई पशु प्रेमियों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया था.
सबसे अधिक आवारा कुत्तों की संख्या उत्तर प्रदेश और कर्नाटक में
देश के राज्यों की स्थिति देखें तो मत्स्य पालन और पशुपालन मंत्रालय के अनुसार भारत में सबसे अधिक आवारा कुत्तों की संख्या उत्तर प्रदेश और कर्नाटक में है. जबकि दादर और नगर हवेली, लक्षद्वीप और मणिपुर में सड़कों पर कोई भी आवारा कुत्ता नहीं है.
मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक उत्तर प्रदेश में आवारा कुत्तों की संख्या 2012 की तुलना में 2019 में घटकर 20.59 लाख रह गई. वहीं केरल में इनकी संख्या बढ़कर 2.89 लाख हो गई है. केरल सरकार ने इसके लिए विशेष निगरानी समितियां बनाई हैं.
मुंबई में आवारा कुत्तों और बिल्लियों को खाना खिलाने का है कानून
मुंबई ने संतुलित नीति अपनाई है. वहां आवारा कुत्तों और बिल्लियों को खाना खिलाना कानूनी है लेकिन केवल निर्धारित स्थानों पर. गोवा देश का पहला रेबीज़ कंट्रोल्ड राज्य बन चुका है जहां 2017 से इंसानों में रेबीज़ का कोई मामला नहीं आया था, हालांकि 2023 में एक मौत का मामला दर्ज हुआ.
सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश सामाजिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर एक बड़ी चुनौती बन सकता है. एक तरफ जहां सड़कों से जानवरों को हटाने से लोगों की सुरक्षा बढ़ेगी, वहीं दूसरी ओर पशु अधिकारों और मानवीय संवेदनाओं का प्रश्न भी खड़ा होगा. राज्यों को अब कानूनी प्रावधानों के साथ व्यवहारिक समाधान भी ढूंढने होंगे ताकि न तो आम जनता को नुकसान हो और न ही पशुओं के साथ अमानवीय व्यवहार किया जाए. यह फैसला साफ संकेत देता है कि अब देश में पशु नियंत्रण के लिए गंभीर और वैज्ञानिक नीति की आवश्यकता है.