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  • 2025-11-07

Jharkhand Police Station: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी थानों में नहीं लगे सीसीटीवी, 334 थानों में लगने थे सीसीटीवी

Ranchi: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पांच साल बाद भी राज्य के थानों में सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे हैं। लेकिन अब गृह विभाग ने सीसीटीवी लगाने के लिए चार सदस्यीय अध्ययन टीम बनायी है। टीम तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद, बंगाल की राजधानी कोलकाता व ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में सीसीटीवी लगाए जाने का अध्ययन करेगी। गृह विभाग के आदेश के अनुसार, आईजी मानवाधिकार क्रांति कुमार गडिदेशी के नेतृत्व में चार सदस्यीय अध्ययन टीम नवंबर के दूसरे माह से इन शहरों में जाकर थानों में सीसीटीवी लगाए जाने के तरीकों का अध्ययन करेगी।
मसलन, जिन जगहों पर थानों में सीसीटीवी लगाए गए हैं, उनकी मॉनिटरिंग कामॉड्स क्या है। सीसीटीवी किस स्तर की है, साथ ही कितने दिनों के फूटेज को स्टोर किया जाता है, इन तमाम विषयों पर टीम अध्ययन करेगी। इसके बाद इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट गृह विभाग को सौंपी जाएगी।

अब तक क्यों लटका रहा मामला? 

झारखंड के सभी थानों में सीसीटीवी लगाने का मामला दो विभागों गृह व सूचना प्रद्यौगिकी के पेच में फंसा रह गया। दिसंबर 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों, केंद्र प्रशासित प्रदेशों व केंद्रीय एजेंसियों को आदेश दिया था कि वह अपने कार्यालय, दफ्तरों, हाजत में सीसीटीवी कैमरे लगाएं। मानवाधिकार हनन की वारदातों पर लगाम कसने के उदेश्य से सुप्रीम कोर्ट ने 24 घंटे की निगरानी का फैसला सुनाया था। 

झारखंड के 606 थानों में तकरीबन 200 करोड़ की लगात से सीसीटीवी लगाने के लिए पूर्व में झारखंड पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन को नोडल एजेंसी बनाया गया था। पुलिस निगम द्वारा पहले चरण में राज्य के 334 थानों में सीसीटीवी लगाने के लिए कुल 107 करोड़ 14 लाख 4022 रुपये की राशि अनुमानित थी। पुलिस निगम ने सीसीटीवी लगाने के लिए अर्नेस्ट एंड यंग नाम की कंपनी से डीपीआर भी बनवाया था।

आदेश के अनुपालन पर कोर्ट मांग रहा रिपोर्ट

थानों में सीसीटीवी लगाने को लेकर राज्य सरकार से सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगातार प्रगति रिपोर्ट मांगी जाती है। सीसीटीवी लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 2023 की डेडलाइन तय भी की थी। राज्य सरकार ने पूर्व के हलफनामे में सीसीटीवी लगाने का मामला प्रक्रियाधीन होने की जानकारी उच्चतम न्यायालय को दी थी। झारखंड हाईकोर्ट ने भी सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन का आदेश पूर्व में जारी किया था। राज्य सरकार द्वारा 2022-23 के वित्तीय वर्ष के बजट में सीसीटीवी लगाने के प्रावधान का जिक्र किया गया था। तत्कालीन वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव के बजटीय भाषण में भी राज्य भर के थानों में सीसीटीवी लगाने की बात कही गई थी।

कहां फंसा है पेंच?

गृह विभाग के अधीन पुलिस निगम द्वारा सीसीटीवी लगाने से जुड़ी इंटरेस्ट ऑफ एक्सप्रेशन भी प्रकाशित की गई थी। लेकिन तत्कालीन गृह सचिव राजीव अरुण एक्का ने एक आदेश जारी किया, जिसके बाद इसके लिए नोडल एजेंसी के तौर पर सूचना एवं प्रद्यौगिकी विभाग को सीसीटीवी लगाने की जिम्मेदारी सौंप दी। सीसीटीवी लगाने के लिए डीपीआर बनाने वाली कंपनी को भी भुगतान हो चुका था, ऐसे में मामला फंस गया।
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