National News: बिहार में छठ पर्व की शुरुआत के साथ ही ट्रेनों में उमड़ी अपार भीड़ ने एक बार फिर रेलवे व्यवस्था की पोल खोल दी है. दिल्ली, मुंबई, सूरत, अहमदाबाद, कोलकाता और अन्य महानगरों से बिहार जाने वाली ज्यादातर ट्रेनों में यात्रियों की भीड़ इस कदर है कि लोग ट्रेन की छतों, दरवाजों और खिड़कियों से लटककर सफर करने को मजबूर हैं. टिकट मिलना लगभग नामुमकिन हो गया है और रेलवे प्लेटफॉर्म पर अफरातफरी का माहौल है.
इस स्थिति पर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने मोदी सरकार को कठघरे में खड़ा किया है. उन्होंने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि त्योहारों के इस मौसम में जब लोग अपने घरों की ओर लौटना चाहते हैं, तब सरकार उन्हें सम्मानजनक यात्रा का अधिकार भी नहीं दे पा रही है. राहुल गांधी ने लिखा कि दिवाली, भाईदूज और छठ सिर्फ त्योहार नहीं, बल्कि बिहार और पूर्वांचल के लाखों परिवारों के लिए अपने गांव, अपनी मिट्टी और अपनेपन से जुड़ने का अवसर है. लेकिन आज यह लालसा एक संघर्ष में बदल गई है.
उन्होंने कहा कि बिहार जाने वाली ट्रेनों में ठसाठस भीड़ है, टिकट मिलना नामुमकिन है और यात्रियों को अमानवीय परिस्थितियों में सफर करना पड़ रहा है. कई ट्रेनों में क्षमता से दो गुना से अधिक यात्री सवार हैं. लोग घंटों स्टेशन पर खड़े रहते हैं, फिर भी उन्हें ट्रेन में चढ़ने की जगह नहीं मिलती. राहुल गांधी ने सवाल किया कि मोदी सरकार के दावे कहां गए कि इस बार त्योहारों पर यात्रियों की सुविधा के लिए 12 हजार स्पेशल ट्रेनें चलेंगी. उन्होंने कहा कि हर साल यह स्थिति और बदतर होती जा रही है और सरकार पूरी तरह नाकाम साबित हो रही है.
राहुल गांधी ने इसे “डबल इंजन सरकार की असली सच्चाई” बताया. उन्होंने कहा कि अगर बिहार में रोजगार, सम्मानजनक जीवन और मूलभूत सुविधाएं होतीं तो लोगों को हर साल ऐसे अपमानजनक हालात में घर लौटने को मजबूर नहीं होना पड़ता. लाखों प्रवासी मजदूर सिर्फ त्योहारों पर अपने परिवार से मिलने के लिए सैकड़ों किलोमीटर का सफर करते हैं, लेकिन उन्हें सुरक्षा और सुविधा के बजाय लाचारी और भीड़ का सामना करना पड़ता है.
उन्होंने कहा कि ये दृश्य सिर्फ मजबूर यात्रियों का नहीं, बल्कि एनडीए सरकार की नीतियों की असफलता और उसकी प्राथमिकताओं का आईना हैं. राहुल गांधी ने कहा कि यह जनता का अधिकार है कि उन्हें त्योहारों पर घर जाने के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक यात्रा मिले. यह कोई सरकार का एहसान नहीं, बल्कि उसका कर्तव्य है.
बिहार में छठ जैसे पर्वों के दौरान हर साल ट्रेनों में बढ़ती भीड़ एक स्थायी समस्या बन चुकी है. रेलवे प्रशासन की नाकामी और सरकार की लापरवाही के कारण स्थिति में कोई सुधार नहीं दिख रहा है. राहुल गांधी के बयान से यह मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है. यह सिर्फ यात्री सुविधा का सवाल नहीं, बल्कि उस प्रवासी संकट की याद भी दिलाता है जो रोजगारहीनता और क्षेत्रीय असंतुलन की देन है. जब तक बिहार और पूर्वांचल में रोजगार के अवसर नहीं बढ़ेंगे, तब तक यह वार्षिक पलायन और भीड़ का सिलसिला जारी रहेगा.