Jharkhand Breaking: जमशेदपुर में हुए जीएसटी घोटाले के मामले में एक बार फिर बड़ा मोड़ आया है. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई के बाद अब आरोपी कारोबारी विक्की भालोटिया उर्फ अमित अग्रवाल की जप्त संपत्ति के अटैचमेंट पर फिलहाल रोक लगी रहेगी. झारखंड हाईकोर्ट ने शुक्रवार को इस संबंध में सुनवाई की और अगली तारीख 6 नवंबर तय की है.
दरअसल, विक्की भालोटिया की ओर से झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी, जिसमें एजुकेटिंग अथॉरिटी, पीएमएलए द्वारा उनकी संपत्ति के अटैचमेंट की फाइनल सुनवाई में आदेश पारित करने पर रोक लगाने की मांग की गई थी. इस मामले में ईडी ने अपना जवाब कोर्ट में दाखिल कर दिया है. वहीं, याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता जतिन सहगल और शैलेश पोद्दार ने कोर्ट से अपना प्रत्युत्तर दाखिल करने के लिए समय मांगा.
याचिका में यह दलील दी गई थी कि एजुकेटिंग अथॉरिटी, पीएमएलए का कोरम अभी पूरा नहीं है. नियमानुसार तीन सदस्यों का होना आवश्यक है, जबकि फिलहाल केवल एक सदस्य ही कार्यरत हैं. ऐसे में जब तक कोरम पूरा नहीं होता, तब तक किसी भी प्रकार का अंतिम आदेश पारित नहीं किया जाना चाहिए. कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार करते हुए विक्की भालोटिया की जप्त संपत्ति के अटैचमेंट पर रोक को अगली सुनवाई तक जारी रखने का निर्देश दिया.
ईडी की जांच में खुलासा हुआ था कि जमशेदपुर के कारोबारी विक्की भालोटिया सहित कई व्यापारियों ने फर्जी शेल कंपनियों के माध्यम से करोड़ों रुपये की जीएसटी चोरी की थी. जांच के दौरान एजेंसी ने पाया कि 90 से अधिक फर्जी कंपनियों के नाम पर टैक्स क्रेडिट का गलत लाभ लिया गया.
क्या है पूरा मामला
इस घोटाले का खुलासा तब हुआ जब जीएसटी इंटेलिजेंस ने फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट के जरिए किए गए करोड़ो के घोटाले की जांच शुरू की. इस दौरान यह सामने आया कि शिव कुमार देवड़ा, सुमित गुप्ता और अमित गुप्ता समेत आरोपियों ने करीब 14,325 करोड़ रुपये के फर्जी चालान तैयार किए थे. इन फर्जी चालानों के माध्यम से करोड़ो का टैक्स रिफंड गलत तरीके से लिया गया, जिससे सरकार को भारी राजस्व नुकसान हुआ.
जीएसटी अधिकारियों ने इस मामले में दिनेश सिंह के बयान के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की थी. इसके बाद शिव कुमार देवड़ा, सुमित गुप्ता और अमित गुप्ता को जेल भेजा गया था. बाद में ईडी ने इस मामले को अपने हाथ में लेकर ईसीआईआर दर्ज की और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की. ईडी ने अब तक चार से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें जुगसलाई निवासी विक्की भालोटिया, कोलकाता के कारोबारी अमित गुप्ता, मोहित देवड़ा और शिवकुमार देवड़ा शामिल हैं.
ईडी की कार्रवाई के बाद कई बैंकों और वित्तीय संस्थानों से लेन-देन के रिकॉर्ड जुटाए गए हैं. बताया जाता है कि फर्जी कंपनियों के खातों में करोड़ों रुपये का लेन-देन हुआ, जिनका सीधा संबंध इन व्यापारियों से था.
यह मामला केवल कर चोरी का नहीं, बल्कि आर्थिक तंत्र में गहरे बैठे भ्रष्टाचार की परतें उजागर करता है. करोड़ो रुपये के इस घोटाले ने यह साफ कर दिया है कि फर्जी कंपनियों का नेटवर्क किस हद तक संगठित है और सरकारी निगरानी तंत्र कितनी कमजोर है. ईडी की जांच अब इस दिशा में बढ़ रही है कि यह पैसा आगे कहां निवेश किया गया और किस राजनीतिक या कारोबारी नेटवर्क से जुड़ा है.
यदि इस मामले में ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो यह संदेश जाएगा कि सफेदपोश अपराधी कानून से ऊपर हैं. झारखंड हाईकोर्ट का यह फैसला, जिसमें संपत्ति के अटैचमेंट पर रोक लगाई गई है, फिलहाल कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन आने वाले दिनों में यह जांच यह तय करेगी कि राज्य में आर्थिक अपराधों पर नकेल कसने की ईडी की क्षमता कितनी प्रभावी है.