धनबाद के बलियापुर स्थित मोहलीडीह बस्ती में रहने वाले मोहली समाज के लोग वर्षों से
धनबाद के बलियापुर स्थित मोहलीडीह बस्ती में रहने वाले मोहली समाज के लोग वर्षों से बांस से बनने वाले सूप और दउरा का निर्माण करते आ रहे हैं। ऐसे में छठ के बाजार को लेकर उनकी क्या राय है, यह हमने जानने का प्रयास किया। अपने घर के बाहर बैठ बांस से सूप और दउरा का निर्माण कर रही निशा देवी ने बताया कि वे साल भर सूप और दउरा बनाने का काम करते हैं, लेकिन छठ महापर्व पर सूप और दउरा की काफी अच्छा मांग रहती है।
बाजार से खुद दुकानदार उनके यहां आकर सूप और दउरा ले जाते
बाजार से खुद दुकानदार उनके यहां आकर सूप और दउरा ले जाते हैं। लेकिन सामान्य दिनों में बिक्री काफी कम रहती है। उन्होंने बताया कि लेकिन मेहनत के अनुसार मेहनताना उन्हें उतना नहीं मिल पाता है। उन्होंने कहा कि बांस खरीदकर लाते हैं, उसे छिलते हैं, फिर सुखाते हैं। उसके बाद दउरा-सूप बनाने का काम करते हैं।
वहीं बुजुर्ग महिला कारीगर शांति देवी ने बताया कि बांस को काटकर टोटो वाहन से लाते हैं। दो दिनों तक बांस में ही मेहनत करना पड़ता है। जबकि दुकानदार मात्र 30 से 40 रुपए ही एक सूप या दउरा का दाम देते है, जो उनकी मेहनत के अनुरूप नही होता। बुजुर्ग महिला कारीगर का कहना है कि पीढ़ी दर पीढ़ी वे यही काम करते आ रहें हैं। जब छोटे थे ,उस वक्त से ही सूप और दउरा बना रहें हैं।
सुनील मोहली ने बताया कि
सुनील मोहली ने बताया कि सूप और दउरा का बाजार में सही से रेट नहीं मिल पाता है। सूप का 25 रुपया और दउरा का 100 रु मिलता है। एक पीस बांस की ही कीमत 80 से 100 रुपए है। एक बांस से 4 पीस सूप तैयार होता है। जबकि दउरा 2 पीस ही बन पाता है। जबकि इसी काम से उनका घर का भरण पोषण चलता है। ऐसे में व्व बचाए क्या और खाए क्या।