प्राप्त जानकारी के अनुसार
प्राप्त जानकारी के अनुसार, रात की ड्यूटी पर तैनात होमगार्ड जवान आपस में उलझ गए। शुरुआती बहस जल्द ही हाथापाई में बदली और कुछ ही देर में परिसर में लाठी-डंडे चलने लगे, जिससे अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई। इस दौरान मौके पर मौजूद अन्य जवानों और चिकित्सकों ने बीच-बचाव करने की कोशिश की, लेकिन आक्रोशित जवान किसी की सुनने को तैयार नहीं थे।
सिगरेट और गैर-हाजिरी बनी विवाद की जड़
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, विवाद की शुरुआत परिसर में एक व्यक्ति के सिगरेट पीने से हुई। एक पुलिसकर्मी ने उसे रोका, लेकिन दूसरे पुलिसकर्मी ने यह कहते हुए हस्तक्षेप किया कि वह अस्पताल से दूर है, पीने दो। इस पर दोनों जवानों में कहासुनी शुरू हो गई, जिसने जल्द ही सीनियर-जूनियर विवाद का रूप ले लिया। गाली-गलौज के बाद मामला मारपीट में बदल गया।
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि मारपीट में शामिल जवानों में से राजू झा और विनय चौबे घटना से कुछ समय पहले अपनी ड्यूटी से नदारद थे, जिसकी पुष्टि सीसीटीवी फुटेज से हुई है। मारपीट में शामिल जवानों की पहचान अविनाश कुमार, राजू झा और विनय चौबे के रूप में की गई है। सूत्रों का यह भी कहना है कि कुछ जवान शराब के नशे में थे, जिसने झगड़े को और भड़काया।
प्रशासनिक कार्रवाई की मांग
इस गंभीर घटना पर अस्पताल प्रबंधन ने सख्त रुख अपनाया है। शुक्रवार को, अस्पताल प्रबंधन ने घटना की गंभीरता को देखते हुए, तीनों आरोपी जवानों - अविनाश कुमार, राजू झा और विनय चौबे के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग करते हुए उपायुक्त को लिखित शिकायत भेजी है।
सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
सुरक्षाकर्मियों की यह हरकत अस्पताल की व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती है। सूत्रों का कहना है, "जब सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाले जवान ही अनुशासन तोड़कर मारपीट करेंगे, तो आम लोगों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी?" यह घटना रात की ड्यूटी में जवानों की मनमानी और गैर-हाजिरी के चलन को भी उजागर करती है। प्रशासन अब इस पहलू की भी जांच कर रहा है कि क्या रात की ड्यूटी में अन्य जवान भी अक्सर गायब रहते हैं। फिलहाल मामले की जांच जारी है और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की उम्मीद है।