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  • 2025-10-13

Bihar Elections 2025: बिहार चुनाव में एनडीए की चाल, महागठबंधन की चुप्पी, सीटों के समीकरण से क्या बदलेंगे सियासी हालात?

Bihar Elections 2025: बिहार विधानसभा चुनाव की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है और ऐसे माहौल में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने सीट बंटवारे का ऐलान कर राजनीतिक जमीन पर पहला बड़ा दांव खेल दिया है. बीजेपी और जेडीयू को 101-101 सीटें मिली हैं, जबकि चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को 29 सीटों पर मैदान में उतारा जाएगा. इसके अलावा जीतन राम मांझी की हिन्दुस्तानी आवाम पार्टी (सेक्युलर) और उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा को छह-छह सीटें दी गई हैं. इस घोषणा के साथ एनडीए ने एकजुटता का संदेश देने की कोशिश की है.
दिलचस्प यह है कि पहले चरण के नामांकन तिथि की आखरी तिथि 17 अक्टूबर बेहद करीब है, मगर विपक्षी महागठबंधन अब तक चुप्पी साधे बैठा है. राजद-कांग्रेस और अन्य दलों के बीच सीट शेयरिंग पर सहमति नहीं बन सकी है. ऐसे में सवाल उठ रहा है, क्या एनडीए का यह कदम महागठबंधन पर दबाव बनाने की रणनीति है? क्या महागठबंधन देर से खेल में उतरकर खुद को कमजोर साबित करेगा?

एनडीए में सहमति या समझौता?

बीजेपी नेता धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया पर लिखा कि सीट बंटवारा सौहार्दपूर्ण माहौल में पूरा हुआ है. यह संदेश साफ है कि गठबंधन एकजुट है. हालांकि, गठबंधन के भीतर सब कुछ इतना आसान भी नहीं था. हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा के प्रमुख जीतन राम मांझी ने पहले 15 सीटों की मांग की थी. एक्स पर लिखी गई उनकी कविता से यह संकेत मिल रहा था कि वे कम से कम 15 सीटों पर चुनाव लड़ने की उम्मीद में हैं. पर उन्हें छह सीटों पर समझौता करना पड़ा.

फिर भी मांझी ने खुद ही कहा “जब लोकसभा में एक सीट मिली थी तब भी हम नाराज नहीं हुए.” यह बयान चाहे राजनीतिक शिष्टाचार हो, पर भीतर का असंतोष छुपा नहीं. दूसरी तरफ चिराग पासवान की एलजेपी (रामविलास) ने भले ही हर सीट पर लड़ने की तैयारी जताई थी, पर 29 सीटों पर समझौता कर लिया. उन्होंने भी कोई तीखा बयान नहीं दिया, जिसे बीजेपी के लिए राहत के तौर देखा गया.

उपेंद्र कुशवाहा ने अपने समर्थकों से माफी मांगते हुए लिखा कि उन्हें जितनी सीटें चाहिए थीं, उतनी नहीं मिल सकीं. उनका यह संदेश बताता है कि अंदरखाने में सीटों को लेकर तल्खी मौजूद थी. फिर भी, ऊपर से सब कुछ शांत है.

महागठबंधन की खामोशी, तनाव का संकेत?

एनडीए के बाद अब सबकी नजर महागठबंधन पर है. राजद-कांग्रेस, वाम दलों और अन्य सहयोगी दलों के बीच सीट बंटवारा अब तक फाइनल नहीं हुआ है. सीपीआई (एमएल) ने 40 सीटों की मांग की थी, जो अब 30 के आसपास मानी जा रही है. पिछली बार 19 सीटों पर लड़कर अच्छा प्रदर्शन करने वाले माले को इस बार भी उतनी ही सीटें देने की बात हो रही है, जिससे भीतर नाराजगी पनप रही है.

कांग्रेस 70 सीटों पर लड़ना चाहती है, लेकिन वह यह भी चाहती है कि उसे मजबूत सीटें दी जाएं. कांग्रेस का कहना है कि पिछली बार जिन 70 सीटों पर वह उतरी थी, उनमें कम से कम 25 सीटें उसकी जिताऊ थीं. इस बार वह अपना दावा हल्का नहीं करना चाहती.

विकासशील इंसान पार्टी के प्रमुख मुकेश सहनी ने साफ कहा “महागठबंधन थोड़ा अस्वस्थ है.” उन्होंने यह भी इशारा किया कि इलाज दिल्ली में होगा. राजनीतिक हल्कों में इसे इस रूप में देखा जा रहा है कि सीटों पर सहमति बनाना आसान नहीं रह गया है.

लैंड फॉर जॉब केस की परछाई

13 अक्टूबर को दिल्ली की विशेष अदालत लैंड फॉर जॉब मामले में फैसला सुना सकती है, जिसमें तेजस्वी यादव और उनके परिवार पर आरोप हैं. चुनावी मौसम में यह फैसला महागठबंधन की राजनीति को नई दिशा दे सकता है. राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि शायद इसी वजह से महागठबंधन जानबूझकर सीट बंटवारे को टाल रहा है. फैसला आने के बाद ही गठबंधन कोई खुली घोषणा करेगा.

क्या एनडीए ने बढ़त हासिल कर ली?

बिहार में 1952 से अब तक 17 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं. इस बार के चुनाव में एनडीए, महागठबंधन के अलावा प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी भी मैदान में होगी. ऐसे में समीकरण और दिलचस्प हो गए हैं.

एनडीए ने जिस त्वरित रणनीति से सीटों की घोषणा की है, उससे उसने यह संदेश दिया है कि अंदर कोई टूट-फूट नहीं है. 2020 में जब एलजेपी अलग होकर लड़ गई थी, तब एनडीए को नुकसान हुआ था. इस बार चिराग को साथ रखकर बीजेपी ने इस फूट को पहले ही बंद कर दिया है.

इतिहास में पहली बार बीजेपी और जेडीयू बराबर सीटों पर लड़ेंगे. पिछली बार जेडीयू ने 122 और बीजेपी ने 121 सीटें ली थीं. इस बार 101-101 का फार्मूला दोनों दलों के बीच संतुलन का संकेत देता है.

महागठबंधन को देर भारी न पड़ जाए?

महागठबंधन के भीतर यह चर्चा है कि राजद को 135 से 140, कांग्रेस को 52 से 57, माले को 19 से 22, भाकपा को 6 से 7, माकपा को 4 से 6, वीआईपी को 18 से 22, रालोजपा और झामुमो को 1 से 3 सीटें मिल सकती हैं. लेकिन यह सिर्फ कयास हैं. जब तक आधिकारिक घोषणा नहीं होती, तब तक यह समीकरण हवा में ही हैं.

फिलहाल, एनडीए ने खेल की पहली चाल चल दी है. महागठबंधन अभी इंतजार में है या उलझन में, यह स्पष्ट नहीं. लेकिन बिहार की राजनीति सिखाती है कि अंतिम मोड़ पर हुई चाल ही सबसे बड़ी जीत का कारण बनती है.

दो चरणों में होंगे चुनाव

इस बार बिहार चुनाव दो चरणों में होंगे, 6 नवंबर को पहले और 11 नवंबर को दुसरे चरण में वोट डाले जाएंगे, जबकि नतीजे आएंगे 14 नवंबर को आएगा. उससे पहले इस सीट युद्ध में कौन बाजी मारता है, यही असली चुनावी पटकथा तय करेगा.
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