प्रत्याशी के नाम पर बीजेपी और
झामुमो का स्टैंड
प्रत्याशी के नाम पर झामुमो और
बीजेपी का राग एक है. झामुमो प्रवक्ता मनोज पांडेय का कहना है कि मुख्यमंत्री
हेमंत सोरेन सही समय पर सही फैसला लेते हैं. वही बीजेपी प्रवक्ता अजय साह के
मुताबिक बहुत जल्द प्रदेश स्तर पर योग्य उम्मीदवारों के साथ केंद्रीय नेतृत्व को
अवगत कराया जाएगा. इसके बाद एक नाम की घोषणा हो जाएगी लेकिन सच यह है कि ऑफ द
रिकॉर्ड, झामुमो से रामदास सोरेन के बेटे
सोमेश सोरेन और बीजेपी की ओर से पूर्व सीएम चंपाई सोरेन के बेटे बाबूलाल सोरेन के
नाम की चर्चा राजनैतिक गलियारों में है.
यह चुनाव बीजेपी के लिए बेहद खास है
क्योंकि साल 2000 के चुनाव में जिस बीजेपी के पास एसटी
के लिए रिजर्व 28 सीटों में से 14 सीटों पर कब्जा था, उसके खाते में अब सिर्फ एक एसटी सीट है. वो भी झामुमो से आए चंपाई
सोरेन की सरायकेला सीट की बदौलत. पार्टी ने 2024 के चुनाव में चंपाई के बेटे बाबूलाल सोरेन को घाटशिला से प्रत्याशी
बनाया था लेकिन वे रामदास सोरेन से चुनाव हार गये थे. तब रामदास सोरेन मंत्री के
पद पर थे. 2024 के चुनाव में इंडिया गठबंधन की ओर से
झामुमो ने 20 और कांग्रेस ने 7 एसटी सीटें जीतकर, बीजेपी के सारे समीकरण ध्वस्त कर दिए थे. फिलहाल घाटशिला की सीट
झामुमो के लिए प्रतिष्ठा और सहानुभूति से जुड़ी हुई है जबकि बीजेपी इसे वापसी के
तौर पर देख रही है.
दोनों दलों से कौन-कौन हैं रेस में
झामुमो की ओर से अभी तक सिर्फ एक नाम
की चर्चा है. वो हैं रामदास सोरेन के पुत्र सोमेश सोरेन जबकि बीजेपी की ओर से 2024
का चुनाव लड़ने वाले बाबूलाल सोरेन सबसे प्रमुख
दावेदार बताए जा रहे हैं. हालांकि बीजेपी के पूर्व प्रत्याशी सह एसटी मोर्चा के
प्रदेश उपाध्यक्ष रहे लखन मार्डी और केंद्रीय कार्यकारिणी सदस्य रमेश हांसदा के
नाम की भी चर्चा है.
सीता सोरेन की बेटी जयश्री के चुनाव
लड़ने की कयास
इस दौरान झामुमो से बीजेपी में आई
दिवंगत शिबू सोरेन की बड़ी बहू सीता सोरेन की बेटी जयश्री के भी इंट्री की
सुगबुगाहट है. सूत्रों के मुताबिक यही वजह है कि झामुमो अपने पत्ते नहीं खोल रही
है और कहा जा रहा है कि अगर बीजेपी, गुरूजी
की पोती को प्रत्याशी घोषित करती है तो झामुमो की ओर से स्वर्गीय रामदास सोरेन की
पत्नी को प्रत्याशी बनाया जा सकता है.
मंत्री वाला एक्सपेरिमेंट रहा है सफल
दरअसल, झारखंड में मंत्री और परिवार से किसी को प्रत्याशी बनाने वाले
एक्सपेरिमेंट सफल रहा है. पांचवी विधानसभा में हाजी हुसैन अंसारी के निधन से
मधुपुर सीट खाली हुई थी. तब उनके बेटे हफिजुल हसन को उपचुनाव के पूर्व मंत्री
बनाया गया था. इसका चुनाव में उन्हें फायदा मिला था. इसी तरह जगरनाथ महतो के निधन
पर डुमरी से उनकी पत्नी बेबी देवी को उपचुनाव पूर्व मंत्री बनाया गया था. उनकी भी
जीत हुई थी. ये बात अलग है कि बेबी देवी मंत्री रहते 2024 के चुनाव में जयराम कुमार महतो से हार गई थी. तीसरा मौका है जब किसी
मंत्री के निधन से घाटशिला सीट खाली हुई है लेकिन अभी तक रामदास सोरेन के परिवार
से किसी को मंत्री नहीं बनाया गया है. सच यह है कि इस सस्पेंस का जवाब सिर्फ
मुख्यमंत्री के पास है. फिलहाल, कयासों
का दौर जारी है.