National News: लद्दाख में राज्य का दर्जा बहाल करने और संविधान की छठी अनुसूची लागू करने की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन ने शुक्रवार को बड़ा मोड़ ले लिया. पर्यावरणविद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को पुलिस ने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत गिरफ्तार कर लिया है. उनकी गिरफ्तारी उस घटना के चंद घंटे बाद हुई, जब लेह में बंद और विरोध प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षाबलों व प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प में चार लोगों की जान चली गई थी. हालात बिगड़ने पर लेह में इंटरनेट सेवाएं भी बंद कर दी गई हैं.
सूत्रों के मुताबिक, दोपहर करीब ढाई बजे लद्दाख पुलिस प्रमुख एस.डी. सिंह जम्वाल के नेतृत्व में पुलिस टीम ने वांगचुक को गिरफ्तार किया. हालांकि उन पर लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं की गई है. गिरफ्तारी के बाद पुलिस उन्हें उनके आवास ले गई.
गृह मंत्रालय ने हाल की हिंसा के लिए सीधे तौर पर वांगचुक को जिम्मेदार ठहराया है. वांगचुक, लेह एपेक्स बॉडी और कर्गिल डेमोक्रेटिक अलायंस के साथ मिलकर पिछले पांच साल से लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और छठी अनुसूची लागू करने की मांग को लेकर आंदोलन चला रहे हैं. वहीं, वांगचुक ने अपने खिलाफ लगे आरोपों से इनकार करते हुए हिंसा की निंदा की है. उन्होंने बुधवार को अपना 15 दिन का अनशन समाप्त किया था.
गुरुवार को केंद्र सरकार ने कड़ा रुख दिखाते हुए वांगचुक से जुड़े एनजीओ स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख (SECMOL) का एफसीआरए लाइसेंस भी रद्द कर दिया था. इस पर वांगचुक का कहना था कि वह केवल इस संगठन में पढ़ाते हैं और दानदाताओं की सूची में उनका नाम है, लेकिन संस्था के संचालन में उनकी कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं है.
बुधवार को प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच स्थिति अचानक बिगड़ गई थी. भीड़ ने पुलिस पर पथराव किया और बीजेपी कार्यालय में आग लगा दी. जवाब में पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज कर स्थिति पर काबू पाने की कोशिश की.
जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने वांगचुक की गिरफ्तारी को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और केंद्र पर अपने वादों से पीछे हटने का आरोप लगाया. वहीं, वांगचुक ने कुछ दिन पहले ही आशंका जताई थी कि सरकार उन्हें जेल भेजने की तैयारी कर रही है.