Jamshedpur Breaking: साउथ बिहार एक्सप्रेस से शनिवार को 17 बच्चियां और तीन–चार नाबालिग बच्चे लाए जा रहे थे. इनकी उम्र 12 से 18 साल बताई जा रही है. बच्चों के साथ एक सिस्टर और एक फादर भी मौजूद थे.
जानकारी के अनुसार, जब हिंदू परिषद के एक कार्यकर्ता ने उनसे पूछताछ की कि बच्चों को कहां ले जाया जा रहा है, तो स्पष्ट जवाब नहीं मिला. इसके बाद टीटी ने भी उनसे जानकारी मांगी लेकिन कोई ठोस जवाब न देने पर मामला रेलवे पुलिस तक पहुंचा.
बताया जा रहा है कि इन बच्चों को खरसावां से जमशेदपुर के करनडीह लाया जा रहा था, जहां दो दिन के "ट्रेनिंग प्रोग्राम" के नाम पर भोले-भाले आदिवासी बच्चों को रखा जाता है. हिंदू संगठनों का आरोप है कि करनडीह में इससे पहले भी बड़े पैमाने पर धर्मांतरण की गतिविधियां हो चुकी हैं.
मामले की जानकारी मिलने पर विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ता भी सक्रिय हो गए और जांच की मांग करने लगे. प्रथम दृष्टया यह मामला धर्मांतरण से जुड़ा प्रतीत हो रहा है.
इस बीच, सेंट मैरी के फादर और गोलमुरी चर्च के फादर भी मौके पर पहुंचे और बच्चों को छुड़ाने की कोशिश की, लेकिन हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं ने दबाव बनाए रखा और कहा कि बिना जांच किसी भी बच्चे को नहीं छोड़ा जाएगा. साथ ही बच्चों के परिजनों को बुलाने की मांग की गई.
फिलहाल सभी बच्चों को चाइल्ड केयर को सौंपा गया है. उनके माता–पिता के रविवार तक पहुंचने की संभावना है. पुलिस मामले की जांच कर रही है और कहा जा रहा है कि अगर उचित कार्रवाई नहीं हुई तो हिंदू परिषद के कार्यकर्ता डीसी और एसपी से मुलाकात करेंगे.