राज्य की राजनीति में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन विधानसभा उपचुनाव का अपना पुराना सफल फॉर्मूला एक बार फिर आजमा सकते हैं। पितृपक्ष के बाद कैबिनेट विस्तार में दिवंगत मंत्री रामदास सोरेन के पुत्र सोमेश सोरेन को मंत्री पद देकर घाटशिला विधानसभा उपचुनाव में उतारने की तैयारी है। पूर्व में ऐसी रणनीति हेमंत सोरेन आजमा चुके हैं। 2019 में मंत्री हाजी हुसैन अंसारी के निधन के बाद उनके पुत्र हफीजुल हसन को मधुपुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ाने से पहले मंत्री पद की शपथ दिलाई गई थी।
इधर रामदास सोरेन के परिवार से उनके बड़े पुत्र सोमेश सोरेन घाटशिला विधानसभा की राजनीति में सक्रिय हो गए है तो उनके भतीजे विक्टर सोरेन भी राजनीति में पूरी तरह से एक्टिव है।
ऐसे में इन दोनों के बीच से ही किसी को मंत्रीपद दिए जाने की भी प्रबल संभावनाएं है। हालांकि इसपर अंतिम निर्णय पार्टी आलाकमान व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ही लेंगे।
बता दें कि घाटशिला से विधायक और झारखंड से मंत्री रहे रामदास सोरेन का 15 अगस्त को निधन हो गया था, जिसके बाद घाटशिला विधानसभा सीट खाली है। ऐसे में यहां उपचुनाव होना तय है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी भी क्षेत्र का दौरा कर चुके हैं। इसे देखते हुए सियासी सरगर्मी तेज है। कयास लगाए जा रहे हैं कि बीजेपी की तरफ से चंपई सोरेन के बेटे एक बार फिर चुनाव मैदान में उतर सकते हैं। पिछली बार वह रामदास सोरेन से चुनाव वह हार गए थे।
माना जा रहा है कि यह बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान होगा, जो इस वर्ष के अंत या 2026 की शुरुआत में संभावित है। हेमंत सोरेन सरकार इस उपचुनाव को काफी गंभीरता से ले रही है।
घाटशिला पूर्वी सिंहभूम जिले में झामुमो का मजबूत जनाधार वाला क्षेत्र है। रामदास सोरेन ने यहां से 2024 के विधानसभा चुनाव में भारी मतों से पूर्व सीएम चंपई सोरेन के पुत्र को हराकर जीत हासिल की थी।