Crude Oil Price: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है. जुलाई के बाद पहली बार ऐसा हुआ है. भारत के लिए यह चिंता की बात है. देश अपनी जरूरत का करीब 88 फीसदी कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है. अगर तेल की कीमत लंबे समय तक 100 डॉलर से ऊपर रही, तो भारत का आयात खर्च बढ़ेगा. इसका असर रुपये और महंगाई पर भी पड़ सकता है.
तेल महंगा होने से बढ़ेगा खर्च
वित्त मंत्रालय के आकलन के मुताबिक, कच्चा तेल 10 डॉलर प्रति बैरल महंगा होने पर भारत का सालाना आयात खर्च करीब 13 से 14 अरब डॉलर बढ़ सकता है. सितंबर में भारत ने औसतन 102.11 डॉलर प्रति बैरल की कीमत पर कच्चा तेल खरीदा. अगस्त में यह कीमत 90.19 डॉलर थी. इस साल अप्रैल में क्रूड 114.48 डॉलर और मई में 106.23 डॉलर तक पहुंच गया था. जून और जुलाई में कीमत 80 से 83 डॉलर के आसपास आ गई थी.
रुपया भी कमजोर हुआ
क्रूड 100 डॉलर के पार जाने के बीच बुधवार को रुपया डॉलर के मुकाबले 34 पैसे कमजोर होकर 95.08 पर बंद हुआ. महंगे तेल के लिए भारत को ज्यादा डॉलर खर्च करना पड़ता है. इससे डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपये पर दबाव आता है. सितंबर के औसत आंकड़ों के अनुसार, सरकारी तेल कंपनियों को पेट्रोल पर करीब 5 रुपये और डीजल पर करीब 23 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है. घरेलू LPG पर भी करीब 200 रुपये की अंडर रिकवरी बताई गई है. हालांकि पेट्रोल और डीजल के दाम सिर्फ कच्चे तेल से तय नहीं होते. टैक्स, डॉलर की कीमत और तेल कंपनियों का मार्जिन भी इसमें शामिल होता है.
आयात बिल 56 फीसदी बढ़ा
अप्रैल से जुलाई तक भारत का कच्चे तेल का आयात बिल 56 फीसदी से ज्यादा बढ़कर 63.4 अरब डॉलर हो गया. इस दौरान करीब 8.19 करोड़ टन तेल आयात हुआ. यह मात्रा पिछले साल के लगभग बराबर है. यानी तेल की मात्रा लगभग वही रही, लेकिन कीमत बढ़ने से भारत को ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ा.
महंगाई बढ़ने का भी खतरा
अगर क्रूड लंबे समय तक महंगा रहा, तो असर पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं रहेगा. माल ढुलाई और परिवहन महंगा होने से खाने पीने की चीजों और रोजमर्रा के सामान की कीमत बढ़ सकती है. कृषि और उद्योग में भी तेल का इस्तेमाल होता है. ऐसे में महंगा क्रूड भारत में महंगाई का दबाव बढ़ा सकता है.