JPSC Investigation: JPSC मेधा घोटाले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, मामले में नए किरदारों की भूमिका सामने आ रही है. CID की पूछताछ में पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते के कंप्यूटर ऑपरेटर धर्मेंद्र कुमार का नाम भी सामने आया है. जांच एजेंसी के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपितों ने धर्मेंद्र पर निजी परीक्षा एजेंसी TDPL को काम दिलाने के बदले कमीशन लेने का आरोप लगाया है.
एजेंसी को काम दिलाने के बदले कमीशन का आरोप
पूछताछ में सामने आई जानकारी के अनुसार, धर्मेंद्र ने कथित तौर पर TDPL को काम दिलाने के एवज में अपने लिए एक प्रतिशत कमीशन तय किया था. आरोप यह भी है कि वह एल. खियांग्ते के लिए भी पैसों की वसूली करता था. परीक्षा संचालन से जुड़े रामवीर सिंह और TDPL के पूर्व मार्केटिंग मैनेजर अभय कुमार तिवारी से हुई पूछताछ में भी धर्मेंद्र की भूमिका का जिक्र सामने आने की बात कही गई है.
CID के सामने दिए गए अरुण कुमार के बयान में एक और आरोप सामने आया है. अरुण के मुताबिक, धर्मेंद्र ने अपनी पत्नी के नाम पर बुलेट मोटरसाइकिल खरीदने के लिए अभय कुमार तिवारी के बैंक खाते से कथित तौर पर 50 हजार रुपये लिए थे. इस लेन-देन की भी जांच एजेंसी पड़ताल कर रही है.
अलमारी से मिले 8 अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड
जांच के दौरान CID को धर्मेंद्र के कार्यालय की अलमारी से आठ अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड की फोटोकॉपी मिली है. एजेंसी ने इन दस्तावेजों को जांच के लिहाज से अहम माना है. अब यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि ये एडमिट कार्ड धर्मेंद्र के पास कैसे पहुंचे और परीक्षा प्रक्रिया में इनका क्या इस्तेमाल हुआ.
मोबाइल और WhatsApp चैट भी खंगाल रही CID
CID अब मामले से जुड़े आरोपितों के मोबाइल फोन और WhatsApp चैट की भी जांच कर रही है. जांच एजेंसी कथित सिंडिकेट में शामिल लोगों के बीच हुई डिजिटल बातचीत और पैसों के लेन-देन की कड़ियां जोड़ने में जुटी है. इन सबूतों के आधार पर मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी.