National News: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को सेवा तीर्थ में केंद्र सरकार के राज्य मंत्रियों और स्वतंत्र प्रभार वाले मंत्रियों के साथ सीधा संवाद करेंगे। बैठक में विभिन्न मंत्रालयों के कामकाज, सरकार की नीतियों और भविष्य की योजनाओं को लेकर चर्चा होने की संभावना है।
बैठक के दौरान सामाजिक न्याय, कृषि और जनकल्याण से जुड़ी योजनाओं की समीक्षा की जाएगी। इसके अलावा स्वास्थ्य, आयुष और खेल मंत्रालय से संबंधित विषयों पर भी प्रस्तुतियां दी जाएंगी।
राज्य मंत्रियों को अपनी बात रखने का मिलेगा मौका
सूत्रों के अनुसार, संबंधित मंत्रालयों की उपलब्धियों और वर्तमान व भविष्य की नीतियों पर प्रस्तुति दी जाएगी। इसके बाद राज्य मंत्रियों को भी सीमित समय में अपने अनुभव और सुझाव रखने का अवसर मिल सकता है। बताया जा रहा है कि प्रत्येक मंत्री को करीब तीन मिनट तक अपनी बात रखने का समय दिया जाएगा। प्रधानमंत्री बैठक के बाद कुछ चुनिंदा राज्य मंत्रियों के साथ अलग से चर्चा भी कर सकते हैं।
12 साल के कार्यकाल में दूसरी ऐसी बैठक
प्रधानमंत्री मोदी के करीब 12 वर्षों के कार्यकाल में यह दूसरा अवसर है, जब वे राज्य मंत्रियों के साथ इस तरह सीधे संवाद करेंगे। इससे पहले प्रधानमंत्री बनने के करीब नौ महीने बाद मार्च 2015 में उन्होंने राज्य मंत्रियों के साथ बैठक की थी।
उस दौरान सरकार की नीतियों और योजनाओं को लेकर चर्चा हुई थी। साथ ही राज्य मंत्रियों को जनता के बीच जाकर सीधे फीडबैक लेने और उसे सरकार तक पहुंचाने की जिम्मेदारी पर जोर दिया गया था।
मोदी मंत्रिमंडल में 36 राज्य मंत्री, 5 स्वतंत्र प्रभार वाले मंत्री
वर्तमान मोदी सरकार में 36 राज्य मंत्री और पांच राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार के रूप में काम कर रहे हैं। ऐसे में बड़ी संख्या में मंत्रियों के साथ होने वाली यह बैठक सरकार के भीतर समन्वय और कामकाज की समीक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलों के बीच बढ़ा महत्व
यह बैठक ऐसे समय हो रही है, जब केंद्र में मंत्रिमंडल विस्तार या फेरबदल की चर्चाएं तेज हैं। माना जा रहा है कि आगामी BRICS बैठक और 17 सितंबर से शुरू होने वाले भाजपा के देशव्यापी जनसंपर्क अभियान के बीच प्रधानमंत्री अपनी मंत्रिपरिषद में बदलाव कर सकते हैं।
हालांकि, सरकार की ओर से मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। इसके बावजूद राज्य मंत्रियों के साथ प्रधानमंत्री की इस बैठक को राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टिकोण से अहम माना जा रहा है।