Jharkhand News: महिला सुपरवाइजर नियुक्ति से जुड़े मामले में झारखंड स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (JSSC) की अपील पर झारखंड हाईकोर्ट की खंडपीठ ने महत्वपूर्ण आदेश दिया है। चीफ जस्टिस एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने JSSC की अपील पर सुनवाई करते हुए एकल पीठ के पूर्व आदेश पर रोक लगा दी है। मामले की अगली सुनवाई 6 अक्टूबर को निर्धारित की गई है।
15 मई के आदेश को JSSC ने दी चुनौती
JSSC ने न्यायमूर्ति दीपक रोशन की एकल पीठ द्वारा आकांक्षा कुमारी एवं अन्य के मामले में 15 मई 2026 को दिए गए आदेश के खिलाफ अपील दायर की थी। आयोग की ओर से वरीय अधिवक्ता संजय पिपरावाल और अधिवक्ता जयप्रकाश ने खंडपीठ के समक्ष पक्ष रखा।
एकल पीठ के आदेश में JSSC द्वारा दस्तावेज सत्यापन के दौरान कुछ अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी रद्द करने के फैसले को निरस्त कर दिया गया था। साथ ही आयोग को संबंधित अभ्यर्थियों को नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल करने का निर्देश दिया गया था। अब खंडपीठ ने इस आदेश पर रोक लगा दी है।
दस्तावेज सत्यापन में उम्मीदवारी रद्द होने का था मामला
महिला सुपरवाइजर के 444 पदों पर नियुक्ति के लिए प्रक्रिया शुरू की गई थी। दस्तावेज सत्यापन के दौरान JSSC ने कुछ अभ्यर्थियों की योग्यता से संबंधित आपत्तियां दर्ज करते हुए उनकी उम्मीदवारी रद्द कर दी थी। इसके खिलाफ अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का रुख किया था।
एकल पीठ में सुनवाई के दौरान अभ्यर्थियों की ओर से दलील दी गई थी कि भर्ती विज्ञापन और संबंधित नियुक्ति नियमों में तीन विषयों में तीन वर्षीय ऑनर्स डिग्री को अनिवार्य योग्यता के तौर पर स्पष्ट नहीं किया गया है।
अभ्यर्थियों ने तीन विषयों में ग्रेजुएशन का दिया था हवाला
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि महिला सुपरवाइजर पद के लिए सोशियोलॉजी, साइकोलॉजी और होम साइंस विषयों के साथ स्नातक होना आवश्यक बताया गया था। उनका तर्क था कि उन्होंने इन विषयों में ऑनर्स की डिग्री भले हासिल नहीं की है, लेकिन स्नातक की पढ़ाई के दौरान तीनों विषयों का अध्ययन तीन वर्षों तक किया है।
इसी आधार पर उन्होंने दस्तावेज सत्यापन के दौरान उम्मीदवारी रद्द किए जाने को चुनौती दी थी। फिलहाल खंडपीठ द्वारा एकल पीठ के आदेश पर रोक लगाए जाने के बाद मामले में अगली सुनवाई 6 अक्टूबर को होगी।