Hazaribagh: हजारीबाग के शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल को जल्द अपना अस्पताल भवन मिलने वाला है. मेडिकल कॉलेज परिसर में तैयार हो रहा 500 बेड का अस्पताल अब अंतिम दौर में पहुंच चुका है. अस्पताल भवन में फिलहाल रंगाई-पुताई और फिनिशिंग का काम चल रहा है. विभागीय अधिकारियों को उम्मीद है कि दिसंबर 2026 तक भवन का निर्माण पूरा हो जाएगा.
सदर अस्पताल से खत्म होगी निर्भरता
मेडिकल कॉलेज वर्ष 2018 में तैयार हुआ था. अपना अस्पताल भवन नहीं होने के कारण यहां इलाज की व्यवस्था सदर अस्पताल के जरिए चल रही थी. सदर अस्पताल मेडिकल कॉलेज से करीब तीन किलोमीटर की दूरी पर है. ऐसे में डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों को लगातार दोनों जगह आना-जाना पड़ता है. नया अस्पताल शुरू होने के बाद यह परेशानी काफी हद तक खत्म हो जाएगी. मेडिकल कॉलेज और अस्पताल की सुविधाएं एक ही परिसर में मिलेंगी.
छह मंजिला भवन में होंगी आधुनिक सुविधाएं
नया अस्पताल भवन छह मंजिल का है. इसके निर्माण पर करीब 465 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं. मरीजों की आवाजाही को आसान बनाने के लिए भवन में लिफ्ट और रैंप की व्यवस्था की गई है. इसी परियोजना में डीन के लिए आवास, डॉक्टरों के रेजिडेंस और नर्सिंग हॉस्टल का निर्माण भी शामिल है.
कोरोना काल में प्रभावित हुआ था निर्माण
अस्पताल का निर्माण पहले पूरा होने की उम्मीद थी. लेकिन कोविड-19 के दौरान काम की रफ्तार धीमी पड़ गई थी. उस समय पर्याप्त कर्मचारी नहीं मिलने से निर्माण प्रभावित हुआ. बाद में फंड से जुड़ी परेशानी भी सामने आई. परियोजना की लागत में 60 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार और 40 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार दे रही है. अब निर्माण से जुड़ी अड़चनें दूर होने के बाद काम तेजी से चल रहा है.
करीब 350 कर्मचारी कर रहे काम
अस्पताल भवन का मुख्य निर्माण लगभग पूरा हो चुका है. अब बचे हुए काम को पूरा करने पर जोर है. निर्माण एजेंसी के करीब 350 कर्मचारी फिलहाल साइट पर काम कर रहे हैं. रंगाई-पुताई और फिनिशिंग के साथ दूसरी तैयारियां भी की जा रही हैं. पूरे काम की निगरानी झारखंड स्टेट बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन लिमिटेड कर रहा है. निर्माण की जिम्मेदारी शापूरजी पालोनजी एंड कंपनी को दी गई है.
मरीजों को मिल सकती है बड़ी राहत
नया अस्पताल चालू होने के बाद हजारीबाग के अलावा पूरे प्रमंडल से आने वाले मरीजों को फायदा मिलने की उम्मीद है. गंभीर मरीजों के इलाज की बेहतर व्यवस्था होने से उन्हें दूसरे शहरों में रेफर करने की जरूरत कम हो सकती है. मेडिकल छात्रों के लिए भी नई सुविधा महत्वपूर्ण होगी. उन्हें प्रशिक्षण और इलाज से जुड़े काम के लिए सदर अस्पताल तक नहीं जाना पड़ेगा.
एक ही परिसर में पढ़ाई और इलाज
अस्पताल शुरू होने के बाद मेडिकल कॉलेज की पढ़ाई, छात्रों का प्रशिक्षण और मरीजों का इलाज एक ही परिसर में होगा. इससे डॉक्टरों, छात्रों और अस्पताल की अलग-अलग सेवाओं के बीच बेहतर तालमेल बनने की उम्मीद है. झारखंड स्टेट बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन लिमिटेड के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर मुकेश कुमार के अनुसार, करीब 465 करोड़ रुपये की यह परियोजना अब अंतिम चरण में है. उन्होंने बताया कि अस्पताल के साथ डीन रेजिडेंस, डॉक्टर रेजिडेंस और नर्सेज हॉस्टल का निर्माण भी कराया गया है.