Chandra Grahan 2026: 28 अगस्त को साल 2026 का दूसरा और आखिरी चंद्र ग्रहण लगेगा. पंचांग के अनुसार यह ग्रहण भाद्रपद महीने में कुंभ राशि और शतभिषा नक्षत्र में होगा. यह ग्रहण सुबह शुरू होगा और दोपहर तक चलेगा. चंद्र ग्रहण 28 अगस्त की सुबह 6:55 बजे शुरू होगा. सुबह 9:43 बजे यह अपने चरम पर रहेगा. दोपहर 12:30 बजे ग्रहण पूरी तरह खत्म हो जाएगा. यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा. इसी वजह से यहां सूतक काल भी मान्य नहीं होगा. मंदिरों के कपाट खुले रहेंगे. पूजा पाठ और दूसरे धार्मिक काम सामान्य रूप से किए जा सकेंगे.
यह आंशिक चंद्र ग्रहण दुनिया के कई हिस्सों में दिखाई देगा. उत्तरी अमेरिका और दक्षिणी अमेरिका में इसे देखा जा सकेगा. यूरोप और अफ्रीका के कई हिस्सों में भी ग्रहण नजर आएगा. पश्चिमी एशिया के कुछ देशों में भी इसका नजारा दिख सकता है. ज्योतिष में चंद्रमा को मन और भावनाओं से जोड़ा जाता है. ज्योतिषियों के अनुसार ग्रहण के समय बेचैनी या असमंजस महसूस हो सकता है. ऐसे समय में बड़े फैसले जल्दबाजी में न लेने की सलाह दी जाती है. हालांकि ये ज्योतिषीय मान्यताएं हैं.
ग्रहण के बाद दान की परंपरा
भारत में सूतक लागू नहीं होगा. फिर भी धार्मिक मान्यता के अनुसार ग्रहण के समय ईष्ट देव के मंत्रों का जाप किया जा सकता है. ग्रहण खत्म होने के बाद स्नान और घर की सफाई करने की परंपरा है. इस दौरान अनाज और कपड़े दान करने की भी मान्यता है. गायों को हरा चारा खिलाने की परंपरा भी बताई गई है.
विज्ञान के अनुसार ऐसे लगता है चंद्र ग्रहण
वैज्ञानिक नजरिए से चंद्र ग्रहण एक सामान्य खगोलीय घटना है. जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है, तब पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है. इसी स्थिति को चंद्र ग्रहण कहा जाता है. चंद्र ग्रहण पूर्णिमा के दिन ही लग सकता है.
वास्तु को लेकर भी दिए जाते हैं सुझाव
वास्तु मान्यताओं के अनुसार ग्रहण के समय घर की सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने के लिए कुछ उपाय किए जा सकते हैं. पूजा स्थल में रखी खंडित मूर्तियों को हटाने की सलाह दी जाती है. उन्हें सम्मान के साथ जल में प्रवाहित करने की परंपरा बताई गई है. घर में लंबे समय से बंद घड़ियों को ठीक कराना या हटाना भी अच्छा माना जाता है. वास्तु मान्यता के अनुसार बंद घड़ियां प्रगति में रुकावट का संकेत मानी जाती हैं. 28 अगस्त के ग्रहण का भारत में सीधा नजारा नहीं दिखेगा. इसलिए यहां धार्मिक गतिविधियां सामान्य रूप से जारी रहेंगी.