Adityapur: आदित्यपुर स्थित सिद्धेश हॉस्पिटल में एक गर्भवती महिला का करीब चार माह का गर्भ गिरने के बाद सोमवार को परिजनों ने अस्पताल में हंगामा किया. परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल प्रबंधन से जवाब मांगा. घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और पूरे मामले की जानकारी ली. फिलहाल मामले में लगाए गए आरोपों की जांच की जा रही है.
परिजनों ने इलाज में लापरवाही का लगाया आरोप
पीड़ित महिला नमिता डे के परिजनों का कहना है कि वे इलाज के लिए डॉ. मनोरमा सिद्धेश से मिलने अस्पताल पहुंचे थे. हालांकि, महिला का इलाज डॉ. मेघा सिद्धेश की ओर से किए जाने का आरोप लगाया गया है. परिजनों का कहना है कि गर्भावस्था के दौरान उचित निगरानी और उपचार नहीं मिलने के कारण महिला का मिसकैरेज हो गया. डॉक्टर से घटना का कारण पूछे जाने पर विवाद की स्थिति बनने की भी बात परिजनों ने कही.
मेडिकल कागजात को लेकर भी उठे सवाल
परिजनों के अनुसार, अस्पताल के कागजात में महिला चिकित्सक के नाम को लेकर भी उन्हें अंतर दिखाई दिया. उनका दावा है कि पूछने पर अस्पताल के एक कर्मचारी ने कहा, "मैडम का नाम था, जिसे हटा दिया गया है." इसी बात को लेकर परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर मेडिकल रिकॉर्ड में बदलाव किए जाने का आरोप लगाया. हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
मृत भ्रूण को लेकर परिजनों ने पूछे सवाल
परिजनों के अनुसार, डॉ. मेघा सिद्धेश ने बताया कि 2 अगस्त को ही गर्भ में बच्चे की मौत हो गई थी. इसके बाद 6 सितंबर 2026 को एएनएम स्कैन की तारीख दिए जाने की बात कही गई. परिजनों ने सवाल उठाया कि यदि 2 अगस्त को ही बच्चे की मौत हो गई थी तो समय रहते इसकी जानकारी देकर आवश्यक उपचार क्यों नहीं किया गया.
डॉक्टरों ने दवा और स्कैन को लेकर दी सफाई
वहीं डॉ. मनोरमा सिद्धेश और डॉ. मेघा सिद्धेश की ओर से अलग पक्ष सामने आया है. डॉक्टरों के अनुसार, नमिता डे 18 मई से इलाज करा रही थीं और उन्हें लगातार पेट दर्द की शिकायत थी. डॉक्टरों का कहना है कि मरीज को निर्धारित अंतराल पर इंजेक्शन और अन्य दवाएं लेने की सलाह दी गई थी. मरीज राजनगर से करीब 40 किलोमीटर दूर से इलाज के लिए आती थी. डॉक्टरों के मुताबिक, जुलाई में एएनसी स्कैन कराया जाना था, लेकिन निर्धारित तारीख निकल गई.
2 अगस्त को अल्ट्रासाउंड कराया गया था, जिसकी रिपोर्ट मरीज की ओर से डॉक्टर को नहीं दिखाई गई. डॉक्टरों के अनुसार, 15 अगस्त को पेट दर्द की शिकायत के बाद महिला अस्पताल पहुंची. जांच के दौरान गर्भ में बच्चे की मौत की जानकारी सामने आई, जिसके बाद आवश्यक उपचार किया गया.
इलाज और जांच प्रक्रिया को लेकर विवाद
इस मामले में परिजनों की ओर से कई सवाल उठाए गए हैं. उनका कहना है कि जब अस्पताल में ही अल्ट्रासाउंड कराया गया था और उसकी रिपोर्ट उपलब्ध थी, तो डॉक्टरों ने रिपोर्ट देखे बिना अगली तारीख कैसे दी. परिजनों ने यह सवाल भी उठाया कि वे डॉ. मनोरमा सिद्धेश से इलाज कराने पहुंचे थे, तो महिला का इलाज डॉ. मेघा सिद्धेश ने क्यों किया.
पुलिस ने शुरू की मामले की जांच
घटना के बाद अस्पताल परिसर में काफी देर तक हंगामे की स्थिति बनी रही. परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में लापरवाही के साथ दस्तावेजों में बदलाव का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है. फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है. इलाज में वास्तव में किसी तरह की चिकित्सकीय लापरवाही हुई या नहीं, यह जांच और उपलब्ध मेडिकल रिकॉर्ड के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगा.