Ranchi News: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितता और सेटिंग के आरोपों को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है. सीआईडी जांच और मुख्य आरोपी अभय तिवारी की गिरफ्तारी के बाद अब सोशल मीडिया पर चयनित अभ्यर्थियों से भी सवाल पूछे जा रहे हैं.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कोचिंग संस्थानों से जुड़े मामलों को लेकर पोस्ट करने वाले एक हैंडल ने चयनित अभ्यर्थी मनीष को लेकर सवाल उठाए हैं. पोस्ट में अभय तिवारी की ओर से लगाए गए कथित सेटिंग के आरोपों पर उनका पक्ष सामने रखने की मांग की गई है. साथ ही, सोशल मीडिया अकाउंट प्राइवेट करने और कुछ पोस्ट या फोटो हटाने को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं.
सोशल मीडिया पर चयनित अभ्यर्थियों से जवाब मांगने की मुहिम
आंदोलन से जुड़े सोशल मीडिया पोस्ट में चयनित अभ्यर्थियों से यह स्पष्ट करने की मांग की जा रही है कि उनका चयन पूरी तरह उनकी योग्यता और मेहनत के आधार पर हुआ है या नहीं. हालांकि, सोशल मीडिया पर लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
एक अन्य पोस्ट में इस बात को लेकर चिंता जताई गई कि यदि भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार के जरिए अयोग्य उम्मीदवार महत्वपूर्ण सरकारी पदों पर पहुंचते हैं, तो इसका असर प्रशासन और आम लोगों की सुरक्षा पर पड़ सकता है.
सीआईडी जांच में पेपर लीक और इंटरव्यू में पैसे के आरोप
JSSC CGL और JPSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी को लेकर चल रही सीआईडी जांच में कई गंभीर आरोप सामने आने की बात कही जा रही है. जांच के अनुसार, JSSC CGL परीक्षा का पेपर लीक किए जाने और कुछ उम्मीदवारों को परीक्षा से पहले सवाल उपलब्ध कराने का आरोप है.
वहीं, JPSC परीक्षा के इंटरव्यू में अंक बढ़ाने के नाम पर कथित तौर पर बड़ी रकम की मांग किए जाने की बात जांच में सामने आई है. मुख्य आरोपी अभय तिवारी की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसी कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और लेन-देन की कड़ियों की पड़ताल कर रही है.
कथित सिंडिकेट में पूर्व पदाधिकारियों और कोचिंग संचालकों के नाम
जांच से जुड़े आरोपों के अनुसार, अभय तिवारी ने पूछताछ के दौरान JPSC के पूर्व अध्यक्ष, आयोग के कुछ पूर्व सदस्यों और कोचिंग संस्थानों से जुड़े लोगों के कथित नेटवर्क के बारे में जानकारी दी है. जांच में सामने आए आरोपों में इंटरव्यू में अंक बढ़ाने के लिए अलग-अलग उम्मीदवारों से रकम लेने और बिचौलियों के जरिए पैसे पहुंचाने की बात कही गई है. हालांकि, जिन लोगों के नाम आरोपों में सामने आए हैं, उनके खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों को अदालत में साबित होना अभी बाकी है.
DSP और उप कारापाल समेत चयनित अभ्यर्थियों पर भी उठे सवाल
सीआईडी जांच से जुड़े दावों में कथित तौर पर यह भी सामने आया है कि इंटरव्यू में अंक बढ़ाकर चयन कराने वाले उम्मीदवारों में कुछ डीएसपी और एक उप कारापाल शामिल हैं. इसके अलावा CDPO जैसी परीक्षाओं में भी कथित सेटिंग के लिए रकम तय होने की बात सामने आई है.
जांच एजेंसी अब कथित सिंडिकेट के पूरे नेटवर्क, उम्मीदवारों से संपर्क, पैसों के लेन-देन और परीक्षा प्रक्रिया में संभावित भूमिका की जांच कर रही है. फिलहाल मामले में जांच जारी है. आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही हो सकेगी. वहीं, आंदोलन कर रहे अभ्यर्थी भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता, कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.