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  • 2026-08-13

Jharkhand Food Corporation: JSFSC में वित्तीय पारदर्शिता के लिए राज्य के सभी 24 जिलों के खातों की निगरानी करेंगे CA, गड़बड़ी पर सीधे MD को देनी होगी रिपोर्ट

Jharkhand Food Corporation: झारखंड स्टेट फूड एंड सिविल सप्लाई कॉरपोरेशन लिमिटेड (JSFSC) ने अपने वित्तीय कामकाज को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में नई व्यवस्था शुरू करने की तैयारी की है. निगम अब मुख्यालय के साथ राज्य के सभी 24 जिलों के खातों की निगरानी और समेकित वित्तीय रिकॉर्ड तैयार करने के लिए अनुभवी चार्टर्ड अकाउंटेंट फर्मों की सेवाएं लेगा. इस व्यवस्था का उद्देश्य सरकारी राशि के इस्तेमाल में वित्तीय अनुशासन बनाए रखना, रिकॉर्ड को व्यवस्थित करना और किसी भी तरह की गड़बड़ी सामने आने पर समय रहते कार्रवाई सुनिश्चित करना है.

हर जिले के वित्तीय रिकॉर्ड पर रहेगी नजर
नई व्यवस्था के तहत CA फर्मों की जिम्मेदारी केवल खातों को तैयार करने तक सीमित नहीं रहेगी. उन्हें मुख्यालय और जिलों के वित्तीय कामकाज की पेशेवर निगरानी भी करनी होगी. फर्म के पार्टनर या अधिकृत चार्टर्ड अकाउंटेंट को संबंधित काम और तैयार की जाने वाली रिपोर्ट की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करनी होगी. निगम और विभाग की ओर से इन फर्मों की नियुक्ति की जाएगी.

हर लेन-देन का रहेगा पूरा रिकॉर्ड
कॉरपोरेशन में वित्तीय लेन-देन को निर्धारित सॉफ्टवेयर में संबंधित दस्तावेजों के आधार पर दर्ज करना अनिवार्य होगा. इसके लिए डबल एंट्री अकाउंटिंग सिस्टम को व्यवस्थित तरीके से लागू किया जाएगा. कैश बुक, बैंक बुक, जनरल लेजर, जर्नल, खरीद और बिक्री रजिस्टर, फिक्स्ड एसेट रजिस्टर समेत जरूरी वैधानिक रिकॉर्ड को लगातार अपडेट रखना होगा.

हर महीने होगा बैंक और खातों का मिलान
वित्तीय रिकॉर्ड में किसी तरह की गड़बड़ी न रहे, इसके लिए बैंक खातों और नकदी की स्थिति का नियमित मिलान किया जाएगा. अग्रिम राशि, भुगतान और प्राप्तियों का भी हर महीने हिसाब मिलाया जाएगा. इसके साथ GST, TDS, EPF, ESI और प्रोफेशनल टैक्स जैसी वैधानिक देनदारियों की भी जांच की जाएगी. संबंधित कटौतियों और खातों में दर्ज आंकड़ों का मिलान करना CA फर्म की जिम्मेदारी होगी.

भुगतान से पहले बिल और वाउचर की जांच
किसी भी बिल को भुगतान के लिए स्वीकृत करने से पहले उससे जुड़े दस्तावेज और वाउचर की विस्तृत जांच करनी होगी. अगर जांच के दौरान कोई आपत्ति सामने आती है तो उसे स्पष्ट रूप से दर्ज किया जाएगा. निगम की व्यवस्था के अनुसार, एक ही बिल पर बार-बार अलग-अलग आपत्तियां उठाने के बजाय उपलब्ध सभी आपत्तियों को एक साथ दर्ज करने की व्यवस्था रखी जाएगी.

समय पर तैयार होंगे वित्तीय दस्तावेज
वित्तीय वर्ष समाप्त होने के बाद बैलेंस शीट, प्रॉफिट एंड लॉस अकाउंट और कैश फ्लो स्टेटमेंट तय समयसीमा में तैयार करना होगा. केंद्रीय और राज्य वित्त आयोग से जुड़ी योजनाओं के लिए जरूरी यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट भी समय पर जमा करना अनिवार्य होगा. इससे योजनाओं पर खर्च हुई सरकारी राशि का रिकॉर्ड समय पर उपलब्ध कराने और वित्तीय प्रक्रिया को व्यवस्थित रखने में मदद मिलेगी.

नियम टूटने पर सीधे MD को सूचना
अगर किसी प्रस्ताव, भुगतान या वित्तीय प्रक्रिया में निर्धारित नियमों और दिशा-निर्देशों का उल्लंघन मिलता है तो CA फर्म को इसकी जानकारी सीधे प्रबंध निदेशक को देनी होगी. वहीं, निर्धारित जिम्मेदारियों को पूरा करने में देरी होने पर संबंधित फर्म पर लिक्विडेटेड डैमेज लगाया जा सकता है. गंभीर या लगातार लापरवाही की स्थिति में कॉरपोरेशन अनुबंध समाप्त करने की कार्रवाई भी कर सकता है.

सरकारी राशि के इस्तेमाल में जवाबदेही पर जोर
JSFSC को केंद्र और राज्य सरकारों से विभिन्न योजनाओं और विकास कार्यों के लिए बड़ी मात्रा में राशि मिलती है. ऐसे में निगम की नई वित्तीय व्यवस्था का फोकस सरकारी धन के इस्तेमाल में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखने पर है. निगम ने वित्तीय कुप्रबंधन और नियमों की अनदेखी को लेकर सख्त रुख अपनाने की बात कही है. नई व्यवस्था के जरिए मुख्यालय से लेकर जिला स्तर तक वित्तीय रिकॉर्ड को अधिक व्यवस्थित और निगरानी योग्य बनाने की कोशिश की जा रही है.
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