CAG Report Jharkhand: वित्तीय वर्ष 2024-25 में झारखंड की राजस्व प्राप्तियां 7.46 फीसदी बढ़कर 94,489 करोड़ रुपये तक पहुंच गईं. हालांकि, CAG की रिपोर्ट के मुताबिक राजस्व में इस बढ़ोतरी की बड़ी वजह केंद्र सरकार के करों में राज्य को मिलने वाला हिस्सा रहा. केंद्रीय करों और शुल्कों में झारखंड की हिस्सेदारी 2015-16 के 15,969 करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में 42,557 करोड़ रुपये हो गई.
इसके मुकाबले राज्य के अपने कर राजस्व में सिर्फ 1.77 फीसदी की मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई. गैर-कर राजस्व भी GSDP का केवल 2.76 फीसदी रहा. केंद्र से मिलने वाले सहायता अनुदान में भी पिछले साल की तुलना में कोई खास बदलाव नहीं हुआ.
1.09 लाख करोड़ से ज्यादा हुआ कुल खर्च
CAG के अनुसार, 2024-25 में राज्य का कुल व्यय 1,09,212 करोड़ रुपये तक पहुंच गया. इसमें राजस्व व्यय, पूंजीगत व्यय के साथ ऋण और अग्रिम शामिल हैं.
राजस्व व्यय बढ़कर 86,565 करोड़ रुपये हो गया, जो राज्य के GSDP का 16.77 फीसदी है. इसमें वेतन, मजदूरी, पेंशन और ब्याज भुगतान जैसे प्रतिबद्ध खर्चों की हिस्सेदारी 37.24 फीसदी रही. वहीं, सरकार की सब्सिडी का खर्च भी तेजी से बढ़ा. 2023-24 में 4,831 करोड़ रुपये की सब्सिडी के मुकाबले 2024-25 में यह राशि बढ़कर 7,889 करोड़ रुपये हो गई. इसमें अकेले ऊर्जा सब्सिडी पर 5,537 करोड़ रुपये खर्च हुए, जो कुल सब्सिडी का करीब 70 फीसदी है.
पूंजीगत खर्च में आई कमी
रिपोर्ट में सरकार के पूंजीगत व्यय में कमी का भी उल्लेख है. सड़क, पुल और अस्पताल जैसी परिसंपत्तियों के निर्माण पर 2023-24 में 20,570 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे. 2024-25 में यह राशि घटकर 18,410 करोड़ रुपये रह गई.
राजकोषीय घाटा दोगुने से ज्यादा बढ़ा
झारखंड का राजकोषीय घाटा 2023-24 में 6,332 करोड़ रुपये था, जो GSDP का 1.36 फीसदी था. 2024-25 में यह बढ़कर 14,527 करोड़ रुपये हो गया, जो GSDP का 2.81 फीसदी है. हालांकि राज्य ने 2024-25 में 7,924 करोड़ रुपये का राजस्व अधिशेष दर्ज किया, लेकिन यह पिछले साल के 11,252 करोड़ रुपये के मुकाबले काफी कम है.
राज्य की कुल बकाया देनदारियां भी लगातार बढ़ी हैं. 2020-21 में 1,09,184.99 करोड़ रुपये की देनदारी 2024-25 में बढ़कर 1,30,798.56 करोड़ रुपये हो गई.
31,110 करोड़ रुपये खर्च नहीं हो सके
CAG रिपोर्ट में बजट के इस्तेमाल को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं. राज्य के कुल 1,50,938.84 करोड़ रुपये के बजट में से 31,110 करोड़ रुपये यानी करीब 20.61 फीसदी राशि खर्च नहीं हो सकी. दस अनुदानों में 19,648.71 करोड़ रुपये की बचत हुई. इन मामलों में बजट प्रावधान का 7 से 62 फीसदी तक हिस्सा खर्च नहीं किया गया. रिपोर्ट के मुताबिक, विनियोग लेखों में इस बचत की ठोस वजह भी नहीं बताई गई.
वहीं, 46 मामलों में 5,407 करोड़ रुपये के अनुपूरक प्रावधान भी अनावश्यक साबित हुए, क्योंकि संबंधित विभाग मूल बजट प्रावधान की राशि तक खर्च नहीं कर सके.
पूंजीगत खर्च में राजस्व प्रकृति के अनुदान का मामला
रिपोर्ट में 2,879.71 करोड़ रुपये की ऐसी राशि का भी उल्लेख है, जिसे पूंजीगत व्यय के तहत राजस्व प्रकृति के सहायता-अनुदान के तौर पर दर्ज किया गया. इसके अलावा 42.45 करोड़ रुपये को पूंजीगत के बजाय राजस्व मद में दिखाया गया. CAG के मुताबिक, इससे राज्य का राजस्व अधिशेष वास्तविक स्थिति से अधिक दिखाई देने की स्थिति बनी.
श्रम उपकर की राशि ट्रांसफर करने में कमी
श्रम उपकर को लेकर भी रिपोर्ट में गंभीर स्थिति सामने आई है. मार्च 2025 तक कुल 945.67 करोड़ रुपये के श्रम उपकर में से पिछले तीन वर्षों के दौरान सिर्फ 473.74 करोड़ रुपये ही ट्रांसफर किए गए. रिपोर्ट के अनुसार, 31 मार्च 2025 तक 1,60,565.80 करोड़ रुपये से जुड़े 52,855 उपयोगिता प्रमाणपत्र प्रधान महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी) को उपलब्ध नहीं कराए गए थे.
इसके अलावा 4,531 करोड़ रुपये से जुड़े 17,877 एसी बिलों के मुकाबले डीसी बिल भी जमा नहीं किए गए.
PD खातों के मिलान में भी कमी
राज्य के 24 PD खातों के प्रशासकों में से सिर्फ तीन ने कोषागार के रिकॉर्ड के साथ अपने खातों की शेष राशि का मिलान और सत्यापन किया. बाकी 21 प्रशासकों की ओर से यह प्रक्रिया पूरी नहीं की गई. CAG ने इस स्थिति को वित्तीय पारदर्शिता और निगरानी के लिहाज से महत्वपूर्ण माना है.
खनिज अन्वेषण न्यास का भी गठन नहीं
रिपोर्ट के अनुसार, नवंबर 2025 तक झारखंड सरकार ने लघु खनिजों से जुड़ी खोज गतिविधियों के लिए वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य खनिज अन्वेषण न्यास का गठन नहीं किया था. CAG की रिपोर्ट में राजस्व, खर्च, बजट प्रबंधन, देनदारियों और सरकारी खातों के रखरखाव से जुड़ी इन कमियों को दर्ज किया गया है.