Sidhgora Land Dispute: जमशेदपुर के सिदगोड़ा के शिव सिंह बगान इलाके में टाटा लीज की जमीन पर कब्जे और घेराबंदी का विवाद लगातार गंभीर होता जा रहा है. News 26 ने पहले ही अपनी रिपोर्ट में इस मामले को प्रमुखता से उठाया था. अब इस मामले में यह बात सामने आई है कि लैंड विभाग की ओर से जमीन पर कथित कब्जे की जानकारी जिला प्रशासन को दी जा चुकी है और इससे जुड़े दस्तावेजी साक्ष्य भी मौजूद हैं. इसके बावजूद मौके पर अब तक कोई ठोस निरोधात्मक कार्रवाई नहीं होने से प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं.
रविवार को विवादित जमीन पर बड़ी संख्या में लोग पहुंचे और पिलर गाड़कर घेराबंदी शुरू कर दी. इसके बाद इलाके में तनाव का माहौल बन गया. स्थानीय लोगों के अनुसार, अभी भी करीब 40 से 50 लोग मौके पर डेरा जमाए हुए हैं. इससे पहले भी जमीन को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद और तीखी बहस की स्थिति बन चुकी है. ऐसे में किसी भी समय मामला गंभीर रूप ले सकता है.
लिखित जानकारी के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं?
स्थानीय लोग लगातार पुलिस और प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं. उनका सवाल है कि जब लैंड विभाग की ओर से जिला प्रशासन को जमीन को लेकर जानकारी दी जा चुकी है, तो मौके पर मौजूद लोगों और चल रही घेराबंदी को लेकर अब तक प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की गई.
इलाके के लोगों में यह भी आशंका है कि जमीन की घेराबंदी के पीछे उसे छोटे-छोटे प्लॉट में बांटकर बेचने की तैयारी हो सकती है. हालांकि, जमीन की घेराबंदी करने वाले पक्ष का वास्तविक दावा और उसके दस्तावेज क्या हैं, यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा.
क्या प्रशासन किसी बड़ी घटना का इंतजार कर रहा है?
मामले को लेकर सबसे बड़ा सवाल कानून-व्यवस्था को लेकर है. स्थानीय लोगों का कहना है कि जब विवादित जमीन पर लगातार लोगों की मौजूदगी बनी हुई है और पहले भी दोनों पक्ष आमने-सामने आ चुके हैं, तो पुलिस को समय रहते स्थिति नियंत्रित करनी चाहिए.
ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि क्या प्रशासन सिदगोड़ा में भी किसी "DD बार" जैसी बड़ी अप्रिय घटना या खूनी संघर्ष का इंतजार कर रहा है? अगर जमीन को लेकर विवाद बढ़ता है और समय रहते पुलिस हस्तक्षेप नहीं करती, तो किसी भी अप्रिय घटना की जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी?
जमीन खरीदने वालों के लिए भी बड़ा खतरा
स्थानीय लोगों को आशंका है कि यदि कथित रूप से विवादित जमीन को घेरकर बाद में प्लॉट के रूप में बेचा गया तो इसका सबसे बड़ा नुकसान आम खरीदारों को हो सकता है. कई बार लोग मौके पर पिलर और घेराबंदी देखकर जमीन को वैध मान लेते हैं और अपनी जीवनभर की कमाई लगा देते हैं.
बाद में अगर सरकारी जांच में जमीन पर कब्जा या अवैध निर्माण सामने आता है, तो खरीदारों को आर्थिक नुकसान के साथ अपने घर और जमीन से भी हाथ धोना पड़ सकता है. इसलिए किसी भी तरह की खरीदारी से पहले जमीन के मालिकाना हक, लीज रिकॉर्ड, म्यूटेशन, नक्शा और संबंधित विभागों की अनुमति की पूरी जांच जरूरी है.
SSP ने कहा:- मामला संज्ञान में है, उचित कार्रवाई होगी
इस पूरे मामले को लेकर जमशेदपुर के एसएसपी ने कहा है कि मामला उनके संज्ञान में है और इस पर उचित कार्रवाई की जाएगी. अब देखना यह है कि पुलिस और जिला प्रशासन मौके की स्थिति को देखते हुए किस तरह की कार्रवाई करता है. फिलहाल स्थानीय लोगों की नजर प्रशासन के अगले कदम पर है.