Ranchi News : कोयले के अवैध कारोबार से जुड़े मामले की जांच के सिलसिले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के बुलावे पर फॉरेंसिक विशेषज्ञों की टीम रांची पहुंच गई है। टीम कोयला कारोबारियों के ठिकानों से छापेमारी के दौरान जब्त किए गए मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल डिवाइस की जांच करेगी। इन डिवाइस से डिलीट किए गए डाटा को रिकवर करने की कोशिश की जाएगी।
फॉरेंसिक जांच के दौरान बरामद डिवाइस से मिलने वाले डाटा के आधार पर ईडी अवैध कोयला कारोबार से जुड़े नेटवर्क की पड़ताल करेगी। खास तौर पर कारोबार में शामिल लोगों, बिचौलियों और कथित तौर पर संरक्षण देने वाले अधिकारियों एवं प्रभावशाली लोगों की भूमिका की जांच किए जाने की संभावना है।
डिजिटल डिवाइस से रिकवर होने वाले मैसेज, संपर्क और अन्य जानकारी से यह पता लगाने की कोशिश होगी कि कोयला कारोबार से जुड़े लोग किन-किन व्यक्तियों के संपर्क में थे और उनके बीच किस तरह की बातचीत होती थी।
28 जुलाई को धनबाद में हुई थी ईडी की छापेमारी
गौरतलब है कि ईडी ने अवैध कोयला कारोबार से जुड़े मामले की जांच के दौरान 28 जुलाई को धनबाद के कई कोयला कारोबारियों के ठिकानों पर छापेमारी की थी। यह कार्रवाई कोयला घोटाले की जांच के दूसरे चरण के तहत की गई थी। छापेमारी एलबी सिंह और अनिल गोयल से जुड़े लोगों के ठिकानों पर भी की गई थी। ईडी ने एलबी सिंह के साले रंजीत कुमार सिंह और धनबाद नगर निगम के डिप्टी मेयर को भी जांच के दायरे में शामिल किया था।
160 करोड़ रुपये के निवेश से जुड़े दस्तावेज जब्त
छापेमारी के दौरान ईडी ने म्यूचुअल फंड समेत विभिन्न वित्तीय संस्थानों में किए गए करीब 160 करोड़ रुपये के निवेश से जुड़े दस्तावेज जब्त किए थे। एजेंसी ने इन निवेशों को फ्रीज कर दिया है। इसके अलावा छापेमारी के दौरान 200 से अधिक सेल डीड भी जब्त किए गए हैं, जिनकी जांच फिलहाल जारी है।
डायरी में मिले अधिकारियों के पदनाम और रकम
ईडी की कार्रवाई के दौरान एक डायरी भी बरामद हुई थी। इसमें कथित तौर पर कोयला कारोबार को संरक्षण देने वाले अधिकारियों के पदनाम के साथ लाखों रुपये की रकम दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। एजेंसी अब इन प्रविष्टियों की भी जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि दर्ज रकम किससे संबंधित है और इसके पीछे क्या लेन-देन हुआ था। ईडी को उम्मीद है कि जब्त मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल डिवाइस की फॉरेंसिक जांच से मामले में कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं।
डिलीट डाटा रिकवर होने के बाद यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि कोयला कारोबारियों और कथित बिचौलियों के किस-किस व्यक्ति से संपर्क थे, उनके बीच क्या बातचीत हुई और किस तरह के मैसेज या अन्य डिजिटल जानकारी का आदान-प्रदान हुआ। फॉरेंसिक जांच और बरामद दस्तावेजों के विश्लेषण के बाद ही अवैध कोयला कारोबार से जुड़े पूरे नेटवर्क और उसमें कथित रूप से शामिल लोगों की भूमिका की तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।