JPSC JSSC Irregularities: JPSC और JSSC की प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच शनिवार को दो प्रमुख संगठनों ने सरकार के सामने अपना मांग पत्र रखा. JPSC-JSSC Reform Manch ने परीक्षा प्रक्रिया में व्यापक बदलाव की मांग की, जबकि आदिवासी छात्र संघ ने भर्ती परीक्षाओं की न्यायिक जांच, स्थानीय नीति और आदिवासी-क्षेत्रीय भाषाओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया.
Reform Manch ने कई परीक्षाओं को रद्द करने की मांग उठाई
JPSC-JSSC Reform Manch ने उन परीक्षाओं को रद्द करने की मांग की है, जिनकी प्रक्रिया को लेकर संदेह या विवाद सामने आए हैं. इनमें TDPL से जुड़ी JPSC की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा, बैकलॉग 2023, बैकलॉग 2025, FRO, 11वीं-13वीं JPSC और APP परीक्षा शामिल हैं.
मंच ने अभय तिवारी से कथित तौर पर जुड़ी JSSC CGL, JSSC PGT और ACF परीक्षाओं की भी जांच कराने की मांग की है. जांच में गड़बड़ी प्रमाणित होने पर इन परीक्षाओं को भी निरस्त करने की मांग रखी गई.
CBI और ED जांच की मांग
Reform Manch ने जनवरी 2023 में हुई JSSC CGL परीक्षा और सितंबर 2023 में आयोजित री-एग्जाम में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं की जांच CBI और ED से कराने की मांग की है.
इसके अलावा JSSC PGT, माध्यमिक आचार्य, लैब असिस्टेंट, लेडी सुपरवाइजर और उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा से जुड़े मामलों की भी जांच की मांग की गई है.
मंच के अनुसार, जांच की प्रक्रिया तीन महीने के भीतर पूरी होनी चाहिए. किसी एजेंसी, अधिकारी, कर्मचारी या अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आने पर उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए. संगठन ने कहा कि केवल JPSC और JSSC अध्यक्षों का इस्तीफा पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि दोषी सदस्यों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए.
आउटसोर्स एजेंसी से परीक्षा कराने का विरोध
Reform Manch ने JPSC और JSSC की परीक्षाओं में आउटसोर्स एजेंसियों की भूमिका खत्म करने की मांग की है. संगठन का कहना है कि दोनों आयोगों को अपनी परीक्षाएं स्वयं आयोजित करनी चाहिए.
मंच ने PT और Mains के प्रत्येक चरण के बाद कटऑफ जारी करने, अंतिम परिणाम के साथ अभ्यर्थियों को Original Marks और Normalised Marks वाला Score Card उपलब्ध कराने की मांग भी रखी है. Normalisation की पूरी प्रक्रिया और उसका फॉर्मूला सार्वजनिक करने की मांग की गई है.
JPSC PT में सफल अभ्यर्थियों की OMR शीट और Mains की उत्तर पुस्तिकाएं निर्धारित समय सीमा के भीतर ऑनलाइन उपलब्ध कराने का सुझाव भी दिया गया है.
राजनीतिक लोगों की नियुक्ति पर भी उठाए सवाल
संगठन ने JPSC और JSSC में अध्यक्ष या सदस्य के पद पर राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले लोगों या उनके रिश्तेदारों की नियुक्ति नहीं करने की मांग की है.
पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी से जुड़े मामलों की सुनवाई Fast Track Court में कराने तथा 90 दिनों के भीतर मामलों का निपटारा करने की मांग भी सरकार के सामने रखी गई.
उत्पाद सिपाही भर्ती प्रक्रिया के दौरान जान गंवाने वाले अभ्यर्थियों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग की गई है. अभ्यर्थियों की समस्याओं के समाधान के लिए हेल्प डेस्क बनाने और परीक्षा से संबंधित किसी भी बदलाव की जानकारी प्रेस विज्ञप्ति या प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सार्वजनिक करने की मांग भी शामिल है.
दारोगा-सिपाही भर्ती में दौड़ का समय बदलने की मांग
Reform Manch ने पुलिस भर्ती की शारीरिक परीक्षा को लेकर भी बदलाव का प्रस्ताव दिया है. संगठन ने पुरुष अभ्यर्थियों के लिए 1.6 किलोमीटर की दौड़ पूरी करने का समय 7 मिनट और महिला अभ्यर्थियों के लिए 11 मिनट निर्धारित करने की मांग की है.
JPSC में वर्ष 2018 के Age Cutoff को आधार बनाने और JSSC भर्ती में अधिकतम उम्र सीमा बढ़ाकर 42 वर्ष करने की मांग भी रखी गई.
मंच ने JPSC-JSSC की परीक्षा व्यवस्था के लिए अलग कानून, नियम और SOP तैयार करने की मांग की. इसके साथ ही आंदोलनकारी संतोष मरतना का निलंबन खत्म कर उन्हें दोबारा सेवा में लेने तथा CID कांड संख्या 02/25 वापस लेने की मांग भी उठाई गई.
आदिवासी छात्र संघ ने न्यायिक जांच और स्थानीय नीति का मुद्दा उठाया
इधर, आदिवासी छात्र संघ केंद्रीय समिति, रांची के प्रतिनिधिमंडल ने मोरहाबादी स्थित राजकीय अतिथिशाला में सरकार की ओर से गठित चार मंत्रियों की कमेटी के साथ मुलाकात की. प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व डॉ. सुशील कुमार मिंज ने किया. बैठक में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के समिति सदस्य भी शामिल हुए.
संघ ने JPSC और JSSC से जुड़े मामलों की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की. इसके साथ ही 1932 के खतियान को आधार बनाकर राज्य में नियोजन नीति और स्थानीय नीति लागू करने की मांग भी रखी गई.
बैकलॉग नियुक्ति और क्षेत्रीय भाषाओं को लेकर भी मांग
आदिवासी छात्र संघ ने राज्य में बैकलॉग के रिक्त पदों पर जल्द नियुक्तियां करने की मांग की. JPSC के सिलेबस में जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं के अंकों का हिस्सा बढ़ाने तथा इन भाषाओं को अनिवार्य करने की मांग भी प्रतिनिधिमंडल ने रखी.
रांची विश्वविद्यालय में जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं की पढ़ाई पहले की व्यवस्था के अनुसार जारी रखने तथा क्लस्टर व्यवस्था को तत्काल समाप्त करने की मांग भी उठाई गई.
संघ का कहना है कि झारखंड पांचवीं अनुसूची के प्रावधानों से जुड़ा राज्य है, लेकिन आदिवासी समाज को अब तक पर्याप्त रोजगार के अवसर नहीं मिल सके हैं. ऐसे में भर्ती प्रक्रिया में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता देने की जरूरत है.
विश्व आदिवासी दिवस की तैयारियों पर भी चर्चा
सरकार के साथ बैठक के बाद संघ की बैठक दीक्षांत मंडप में हुई. इसमें विश्व आदिवासी दिवस के आयोजन की तैयारियों की समीक्षा की गई. बैठक में इस बार कार्यक्रम को व्यापक स्तर पर आयोजित करने का निर्णय लिया गया.
दोनों संगठनों ने स्पष्ट किया कि मांगों पर ठोस निर्णय होने तक उनकी गतिविधियां और आंदोलन जारी रहेंगे.