Ranchi News : झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर राज्य के छात्रों के लिए केंद्र सरकार से मिलने वाली छात्रवृत्ति राशि बढ़ाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि झारखंड जैसे आदिवासी और पिछड़े राज्य में छात्रों को शिक्षा से जोड़ने के लिए केंद्र का पर्याप्त सहयोग आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने अल्पसंख्यक छात्रों के लिए बंद पड़ी छात्रवृत्ति योजना को भी फिर से शुरू करने का आग्रह किया है।
प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति में मांग के मुकाबले मिली बहुत कम राशि
मुख्यमंत्री ने पत्र में बताया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में राज्य सरकार ने प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए 66.14 करोड़ रुपये की मांग की थी, लेकिन केंद्र सरकार से केवल 12.61 करोड़ रुपये ही प्राप्त हुए। इसी तरह 2025-26 में 45.91 करोड़ रुपये की मांग के मुकाबले राज्य को केवल 3.95 करोड़ रुपये ही मिले।
पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति में भी मांग से काफी कम आवंटन, नेशनल एलोकेशन बढ़ाने की मांग
मुख्यमंत्री के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024-25 में पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए 353.21 करोड़ रुपये की मांग की गई थी, जबकि केंद्र सरकार ने सिर्फ 33.57 करोड़ रुपये जारी किए। वहीं 2025-26 में 370.87 करोड़ रुपये की मांग के मुकाबले केवल 58.22 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध कराई गई।
पत्र में कहा गया है कि झारखंड के लिए वित्तीय वर्ष 2024-25 में 23.78 करोड़ रुपये और 2025-26 में 32.70 करोड़ रुपये नेशनल एलोकेशन के रूप में स्वीकृत किए गए, जो राज्य की जरूरतों के मुकाबले काफी कम हैं। मुख्यमंत्री ने इन राशियों में बढ़ोतरी की मांग की है।
एससी-एसटी छात्रों की छात्रवृत्ति का भी उठाया मुद्दा
मुख्यमंत्री ने पत्र में उल्लेख किया कि एससी-एसटी छात्रों के लिए प्री एवं पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति मद में वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान केंद्र सरकार की ओर से कोई राशि जारी नहीं की गई।
उन्होंने यह भी बताया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत जारी 200 करोड़ रुपये वास्तव में 2022-23 के बकाया (एरियर) और 2023-24 की पहली किस्त की राशि थी। इससे स्पष्ट है कि बाद के वर्षों के लिए केंद्रांश अपर्याप्त है।
अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति योजना फिर से शुरू करने की मांग
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड में अल्पसंख्यक आबादी 23.29 प्रतिशत है, लेकिन 2021-22 के बाद केंद्र सरकार ने अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति योजना के तहत राज्य को कोई राशि उपलब्ध नहीं कराई है। इससे अल्पसंख्यक छात्रों की शिक्षा प्रभावित हो रही है। उन्होंने इस योजना को जल्द दोबारा शुरू करने का आग्रह किया।
छात्रवृत्ति की दरों में समानता की भी मांग
पत्र में मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि वर्तमान में अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति और पिछड़ा वर्ग के छात्रों के लिए प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति की राशि क्रमशः 3,000 रुपये, 3,500 रुपये और 4,000 रुपये प्रति छात्र निर्धारित है। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए निर्धारित राशि अन्य वर्गों की तुलना में कम है, इसलिए इसमें भी संशोधन किया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने पत्र में कहा कि झारखंड सरकार शिक्षा को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने लिखा कि राज्य में भौगोलिक चुनौतियां, सीमित संसाधन और वंचित समुदायों की बड़ी आबादी होने के कारण छात्रों तक सहायता पहुंचाना कठिन है। ऐसे में राज्य के विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास के लिए केंद्र सरकार का सहयोग बेहद जरूरी है।