Jharkhand: झारखंड के विभिन्न विश्वविद्यालयों में एसोसिएट प्रोफेसरों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर दायर जनहित याचिका (PIL) पर गुरुवार को झारखंड उच्च न्यायालय में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए अदालत ने झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) को नियुक्ति की वर्तमान स्थिति पर विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 10 सितंबर की तिथि तय की है।
JPSC ने JET-2024 परीक्षा और रिजल्ट में देरी की वजह बताई
मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ के समक्ष हुई सुनवाई के दौरान JPSC की ओर से पक्ष रखा गया। आयोग ने अदालत को अवगत कराया कि झारखंड एलिजिबिलिटी टेस्ट (JET)-2024 की परीक्षा संपन्न कराई जा चुकी है, लेकिन परिणाम अभी लंबित है। JPSC ने बताया कि मॉडल आंसर की जारी करने और अभ्यर्थियों से आपत्तियां प्राप्त करने की प्रक्रिया जारी थी, लेकिन कुछ तकनीकी व प्रक्रियागत अड़चनों के कारण परिणाम जारी करने की आगे की कार्रवाई में देरी हुई।
खंडपीठ ने प्रक्रिया की पूरी रिपोर्ट तलब की
मामले की गंभीरता को देखते हुए खंडपीठ ने आयोग को स्पष्ट निर्देश दिया कि अगली सुनवाई तक JET-2024 के परिणाम तथा एसोसिएट प्रोफेसर भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी को समाहित करते हुए व्यापक स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।
क्या है पूरा विवाद?
यह जनहित याचिका अनिकेत ओहदार व अन्य की ओर से दाखिल की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि राज्य के उच्च शिक्षण संस्थानों में लंबे समय से एसोसिएट प्रोफेसरों और गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों के अनगिनत पद रिक्त पड़े हैं। नियमत: स्थायी बहाली करने के बजाय प्रशासन संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) पर नियुक्तियां कर रहा है, जो तय वैधानिक मानकों का उल्लंघन है।
संविदा के बजाय नियमित बहाली की मांग
याचिकाकर्ताओं ने अदालत से गुहार लगाई है कि संविदा प्रथा पर रोक लगाकर विश्वविद्यालयों में पारदर्शी एवं नियमित भर्ती प्रक्रिया जल्द से जल्द शुरू की जाए। उनका तर्क है कि योग्य अभ्यर्थियों की स्थायी नियुक्ति से ही राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था में सुधार संभव है और खाली पड़े पदों को नियमानुसार भरा जा सकेगा।