Bhopal Farmers Protest : मध्य प्रदेश में मूंग की सरकारी खरीद को लेकर किसानों का आंदोलन अब तेज होता नजर आ रहा है. प्रदेश के अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में किसान भोपाल पहुंच रहे हैं. कई किसान अपने साथ कई दिनों का राशन, बिस्तर और जरूरी सामान लेकर आए हैं, जिससे यह पता चलता है कि वे लंबे समय तक आंदोलन जारी रखने की तैयारी में हैं.इस पूरे आंदोलन की मुख्य मांग है कि प्रदेश में उत्पादित पूरी मूंग की फसल न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदी जाए.
भोपाल की सीमाओं पर बढ़ाई गई सुरक्षा
किसानों के राजधानी पहुंचने से पहले ही प्रशासन अलर्ट मोड में आ गया. मंगलवार रात से भोपाल की सीमाओं पर सुरक्षा व्यवस्था सख्त कर दी गई और प्रमुख रास्तों पर बैरिकेडिंग लगाई गई. कई जगह किसानों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी. प्रशासन ने किसानों को शहर में प्रवेश करने के बजाय ज्ञापन सौंपने के लिए समझाने की कोशिश की, लेकिन किसान संगठन अपनी मांगों पर कायम रहे.
MSP पर पूरी खरीद की मांग
किसान संगठनों का कहना है कि अरहर, उड़द और मसूर जैसी दलहनी फसलों की खरीद के लिए व्यापक व्यवस्था है, लेकिन मूंग की खरीद सीमित लक्ष्य के आधार पर हो रही है. उनका दावा है कि खरीद सीमा कम होने के कारण बड़ी मात्रा में फसल खुले बाजार में कम कीमत पर बेचनी पड़ती है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है. इसी वजह से वे 100 प्रतिशत MSP पर खरीद की मांग कर रहे हैं.
केंद्र से हस्तक्षेप की मांग
राज्य सरकार ने भी इस मुद्दे पर केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित किया है. कृषि विभाग ने केंद्रीय कृषि मंत्री को पत्र भेजकर बताया है कि इस साल प्रदेश में मूंग का उत्पादन अनुमान से अधिक हुआ है, जबकि खरीद का लक्ष्य कम रखा गया है. ऐसे में बड़ी संख्या में किसानों को समर्थन मूल्य का लाभ मिलने में मुश्किल हो सकती है. वहीं संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े संगठनों ने कहा है कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा.
ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ रही नाराजगी
किसान नेताओं के अनुसार खरीद में देरी, सीमित पंजीकरण, खाद की उपलब्धता और खेती की बढ़ती लागत जैसी समस्याओं से किसान लंबे समय से जूझ रहे हैं. उनका कहना है कि अच्छी पैदावार के बावजूद उचित कीमत नहीं मिलने से किसानों में असंतोष बढ़ा है. यही वजह है कि इस आंदोलन को प्रदेश के कई जिलों से समर्थन मिल रहा है.
आगे क्या हो सकता है
मूंग खरीद को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन अब कृषि खरीद व्यवस्था और किसानों की आय से जुड़े बड़े मुद्दे के रूप में देखा जा रहा है. फिलहाल इस मामले पर कोई अंतिम समाधान सामने नहीं आया है. यदि सरकार और किसान संगठनों के बीच सहमति नहीं बनती, तो आंदोलन आगे और व्यापक हो सकता है. इस मामले में सभी पहलुओं पर स्थिति पर नजर रखी जा रही है.