CBI Action: दक्षिण पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर मंडल में तैनात डिप्टी चीफ सिग्नल एंड टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियर को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने 4 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है. इस कार्रवाई में कोलकाता की निजी कंपनी मैसर्स एमआरटी सिग्नल्स लिमिटेड के दो प्रतिनिधियों को भी पकड़ा गया है. गिरफ्तारी के बाद CBI ने झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल में कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी कर अहम दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जब्त किए हैं.
कॉन्ट्रैक्ट फाइल पास कराने के बदले मांगी थी रिश्वत
CBI के अनुसार, आरोपी अधिकारी चक्रधरपुर डिवीजन में सिग्नल एवं टेलीकम्युनिकेशन से जुड़े कार्यों की कॉन्ट्रैक्ट वेरिएशन फाइल और प्राइस वेरिएशन क्लॉज को मंजूरी देने के एवज में निजी कंपनी से रिश्वत मांग रहा था. आरोप है कि सरकारी प्रक्रिया में अनुचित लाभ पहुंचाने के बदले मोटी रकम की डिमांड की गई थी.
पहले 5 लाख ले चुका था, बाकी रकम लेते पकड़ा गया
जांच एजेंसी के मुताबिक, शिकायत मिलने के बाद 24 जुलाई को मामला दर्ज किया गया. जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी अधिकारी मई 2026 में इसी काम के बदले 5 लाख रुपये पहले ही ले चुका था. शेष रकम लेने के लिए वह हावड़ा स्टेशन पहुंचा, जहां CBI ने पहले से जाल बिछा रखा था. जैसे ही उसने कंपनी के प्रतिनिधियों से 4 लाख रुपये नकद लिए, टीम ने उसे मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया. रिश्वत की पूरी राशि भी बरामद कर ली गई.
झारखंड, बिहार और बंगाल में एक साथ कार्रवाई
गिरफ्तारी के तुरंत बाद CBI की अलग-अलग टीमों ने झारखंड, पश्चिम बंगाल और बिहार में आरोपियों के घरों और अन्य परिसरों पर छापेमारी की. इस दौरान कई दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य जब्त किए गए, जिनकी जांच की जा रही है.
पश्चिम बंगाल में वर्षों बाद बड़ी ट्रैप कार्रवाई
CBI ने बताया कि पश्चिम बंगाल क्षेत्र में रिश्वतखोरी के मामले में कई वर्षों बाद इस तरह की बड़ी ट्रैप कार्रवाई की गई है. एजेंसी का कहना है कि सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान आगे भी इसी तरह जारी रहेगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.