Jamshedpur News: जमशेदपुर के मानगो के आजादनगर थाना क्षेत्र स्थित केनरा बैंक की कबीर मेमोरियल शाखा से गोल्ड लोन के तहत गिरवी रखा गया 1 करोड़ 10 लाख 48 हजार रुपये मूल्य का सोना रहस्यमय ढंग से गायब होने का मामला सामने आया है. घटना के बाद बैंक के ग्राहकों में दहशत का माहौल है. गुरुवार को बड़ी संख्या में महिलाएं बैंक पहुंचीं और अधिकारियों से अपने गिरवी रखे आभूषण दिखाने की मांग की. उनका कहना था कि उन्हें सिर्फ एक बार यह भरोसा दिला दिया जाए कि उनका सोना सुरक्षित है.
मामले की गंभीरता को देखते हुए केनरा बैंक के रीजनल मैनेजर ने बुधवार को आजादनगर थाना पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराई जिसके बाद जांच शुरू कर दी गई है. बैंक प्रबंधन भी अपने स्तर पर पूरे मामले की आंतरिक जांच कर रहा है.
दो साल बाद दर्ज हुई प्राथमिकी
इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि बैंक के अनुसार सोना 12 जून से 18 जून 2024 के बीच गायब हुआ था, जबकि इस मामले में 21 जुलाई 2026 को एफआईआर दर्ज कराई गई. यानी घटना के करीब दो साल बाद मामला पुलिस तक पहुंचा. ऐसे में यह सवाल भी उठ रहे हैं कि नियमित ऑडिट के बावजूद इतने लंबे समय तक यह गड़बड़ी सामने क्यों नहीं आई और आखिर शिकायत दर्ज कराने में इतनी देरी क्यों हुई.
पूर्व बैंक अधिकारियों पर केस
केनरा बैंक के रीजनल मैनेजर मंगेश रामानाथन की शिकायत पर पुलिस ने तत्कालीन और पूर्व अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है. नामजद आरोपियों में तत्कालीन पूर्व सीनियर मैनेजर एवं प्रथम लॉकर इंचार्ज मोहम्मद शाबीर, गोल्ड लोन अधिकारी इमरान खान, द्वितीय चाबी अधिकारी सूरज टुडू, अधिकारी रिया घोष, तत्कालीन शाखा प्रभारी अनुज टोप्पो तथा दो अज्ञात लोग शामिल हैं. बैंक प्रबंधन के मुताबिक वर्तमान में इनमें से कोई भी अधिकारी इस शाखा में कार्यरत नहीं है.
ऑडिट में सामने आई गड़बड़ी
बैंक के नियमित ऑडिट के दौरान रिकॉर्ड का मिलान तिजोरी में रखे गोल्ड लोन के आभूषणों से किया गया. इसी दौरान कई पैकेट गायब पाए गए. इसके बाद बैंक ने आंतरिक जांच शुरू की और पर्याप्त तथ्य मिलने पर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई.
प्राथमिकी में यह भी उल्लेख किया गया है कि तिजोरी तक पहुंच केवल सीमित अधिकारियों की होती है. ऐसे में प्रथम दृष्टया मामला अंदरूनी मिलीभगत का प्रतीत होता है. हालांकि पुलिस ने अभी इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है.
कई पहलुओं पर चल रही जांच
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि तिजोरी आखिर कब और किसकी चाबी से खोली गई. यह भी जांच की जा रही है कि कहीं तिजोरी के साथ कोई तकनीकी छेड़छाड़ तो नहीं हुई. इसके अलावा सीसीटीवी फुटेज, एंट्री रजिस्टर, लॉकर एक्सेस रिकॉर्ड और घटना के समय शाखा में तैनात अधिकारियों की भूमिका की भी गहन जांच की जा रही है.
ग्राहकों में बढ़ी चिंता
घटना सामने आने के बाद बैंक के अन्य ग्राहकों की चिंता भी बढ़ गई है. कई लोगों का कहना है कि अगर बैंक की तिजोरी से करोड़ों रुपये मूल्य का सोना गायब हो सकता है तो उनके गिरवी रखे आभूषण कितने सुरक्षित हैं, यह बड़ा सवाल है. इसी वजह से बड़ी संख्या में ग्राहक बैंक पहुंच रहे हैं और अपने आभूषणों की सुरक्षा को लेकर जानकारी मांग रहे हैं.
पहले भी हो चुका है ऐसा मामला
आजादनगर क्षेत्र में बैंक की तिजोरी से सोना गायब होने का यह पहला मामला नहीं है. इससे पहले बैंक ऑफ बड़ौदा की एक शाखा से करीब 272 ग्राम सोना, जिसकी कीमत 30 लाख रुपये से अधिक थी, गायब हो गया था. उस मामले में एक बैंककर्मी की गिरफ्तारी हुई थी, लेकिन सोना अब तक बरामद नहीं हो सका.
लगातार दूसरी बार बैंक की तिजोरी से गिरवी रखा गया सोना गायब होने की घटना ने बैंकिंग सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है. अब सभी की नजर पुलिस जांच और बैंक की आंतरिक पड़ताल पर टिकी है कि आखिर करोड़ों रुपये मूल्य का सोना तिजोरी से कैसे गायब हुआ और इसके पीछे जिम्मेदार कौन है.