IPS Vacancy In Central Agencies: भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों की कमी देश की प्रमुख केंद्रीय जांच एजेंसियों, खुफिया संगठनों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में लगातार बनी हुई है. केंद्रीय गृह मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, विभिन्न केंद्रीय पुलिस संगठनों में IPS अधिकारियों के 699 स्वीकृत पद हैं, लेकिन इनमें से 177 पद अभी भी रिक्त हैं. ऐसे में झारखंड कैडर के योग्य IPS अधिकारियों के लिए केंद्रीय प्रतिनियुक्ति (Central Deputation) पर जाने का बेहतर अवसर बन सकता है.
IB, CBI और NIA में सबसे ज्यादा अधिकारियों की कमी
रिक्तियों का सबसे अधिक असर देश की प्रमुख जांच और खुफिया एजेंसियों पर दिखाई दे रहा है. इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB), केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) जैसी संस्थाओं में एसपी और डीआईजी स्तर के अधिकारियों के कई पद खाली हैं. इन पदों पर नियुक्त अधिकारी संवेदनशील मामलों की जांच, खुफिया सूचनाओं के संकलन और बड़े अभियानों की निगरानी की जिम्मेदारी संभालते हैं.
पदवार रिक्तियों की स्थिति
केंद्रीय गृह मंत्रालय के ताजा आंकड़ों से स्पष्ट है कि केंद्रीय जांच एजेंसियों और सुरक्षा बलों में लगभग हर स्तर पर आईपीएस अधिकारियों के पद खाली हैं. महानिदेशक (DG) के 15 स्वीकृत पदों में एक पद रिक्त है, जबकि स्पेशल डीजी के 13 पदों में से दो पद अभी तक नहीं भरे जा सके हैं. ये रिक्तियां बीएसएफ और सीआरपीएफ में एक-एक हैं. वहीं एडीजी स्तर पर 34 स्वीकृत पदों में दो पद खाली हैं, जिनमें आईटीबीपी और एनसीआरबी में एक-एक पद शामिल है.
आईजी स्तर पर भी स्थिति चिंताजनक है. 150 स्वीकृत पदों में 13 पद रिक्त हैं. इनमें बीएसएफ और सीबीआई में चार-चार, सीआरपीएफ में दो तथा आईटीबीपी, एनसीआरबी और एनईपीए में एक-एक पद खाली है. डीआईजी स्तर पर 256 स्वीकृत पदों में 51 रिक्तियां दर्ज की गई हैं, जिनमें अकेले इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) में 39 पद खाली हैं. सबसे अधिक कमी एसपी स्तर पर देखने को मिल रही है. 231 स्वीकृत पदों में 108 पद रिक्त हैं. इनमें सीबीआई में 44 और आईबी में 42 एसपी स्तर के पद अब तक नहीं भरे जा सके हैं.
राज्यों से कम प्रतिनियुक्ति बन रही वजह
केंद्रीय एजेंसियों में रिक्तियों की सबसे बड़ी वजह राज्यों से IPS अधिकारियों का पर्याप्त संख्या में प्रतिनियुक्ति पर नहीं आना माना जा रहा है. इसका असर सीधे जांच और खुफिया तंत्र की कार्यक्षमता पर पड़ रहा है. विशेष रूप से CBI और IB जैसी एजेंसियों में एसपी और डीआईजी स्तर के अधिकारी जांच अभियानों और फील्ड ऑपरेशन की रीढ़ माने जाते हैं. बड़ी संख्या में इन पदों के खाली रहने से कई मामलों की जांच और निगरानी की गति प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है.