Chandil: बांग्ला पंचांग के सावन महीने के पहले शनिवार को चांडिल अनुमंडल सहित पूरे मानभूम क्षेत्र में मां विपदतारिणी पूजा का महाव्रत पूरी श्रद्धा, आस्था और भक्ति के साथ मनाया गया। सुबह से ही माता के मंदिरों में पूजा-अर्चना के लिए महिलाओं की लंबी कतारें लगी रहीं। महिलाओं ने निर्जला व्रत रखकर परिवार की सुख-समृद्धि, दीर्घायु और मंगलकामना के लिए विधि-विधान से मां की आराधना की।
13 के अंक का विशेष महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां विपदतारिणी अपने भक्तों को हर प्रकार के संकट और विपत्ति से बचाती हैं। सावन के पहले शनिवार या मंगलवार को होने वाली इस पूजा का विशेष महत्व है। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने मां को 13 प्रकार के फल, 13 प्रकार के फूल और 13 तरह की मिठाइयाँ अर्पित कीं। इसके साथ ही, परिवार के सदस्यों की कलाई पर 13 गांठों वाला पवित्र रक्षा सूत्र बांधा गया, जिसे सुख, समृद्धि और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है।
150 वर्ष पुराने दुर्गा मंदिर में उमड़ा जनसैलाब
चांडिल बाजार स्थित 150 साल पुराने सार्वजनिक दुर्गा मंदिर में सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा। यहाँ चांडिल बाजार के अलावा रुचाप, भालुककोचा, लेंगडीह, गांगूडीह और आस-पास के कई गांवों से बड़ी संख्या में महिलाएं दर्शन के लिए पहुंचीं। पुरोहितों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा संपन्न कराई और उपस्थित श्रद्धालुओं को मां विपदतारिणी की पावन व्रत कथा सुनाई।
भक्तिमय हुआ पूरा वातावरण
इस दौरान महिलाओं ने अखंड सौभाग्य, निरोगी जीवन और संकटों से मुक्ति का आशीर्वाद मांगा। मंदिरों में लगातार हो रहे धार्मिक अनुष्ठानों, कथा श्रवण और मां के जयकारों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा है। श्रद्धालुओं ने दृढ़ विश्वास जताया कि मां की कृपा से जीवन की हर बाधा दूर होती है और सुख-शांति का वास होता है।