Jharkhand Crime News: झारखंड में इन दिनों "डेविल्स ग्रुप ऑफ गोड्डा" का नाम लगातार चर्चा में है. सोशल मीडिया पर इस ग्रुप से जुड़े बताए जा रहे युवकों की हथियारों के साथ कई तस्वीरें वायरल होने के बाद पुलिस भी अलर्ट मोड में आ गई है. तस्वीरों में AK-47, पिस्टल और अन्य हथियार नजर आने के दावे किए जा रहे हैं. हालांकि इन तस्वीरों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
अब सवाल यह है कि आखिर डेविल्स ग्रुप ऑफ गोड्डा की शुरुआत कैसे हुई और कुछ वर्षों में यह नाम इतना चर्चित कैसे बन गया?
लॉकडाउन के दौरान बना WhatsApp ग्रुप
पुलिस और स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारियों के अनुसार, इस ग्रुप की शुरुआत कोरोना लॉकडाउन के दौरान वर्ष 2020 में हुई बताई जाती है. उस समय स्कूल, कॉलेज और अधिकांश संस्थान बंद थे. बड़ी संख्या में युवा सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर सक्रिय थे.
बताया जाता है कि इसी दौरान एक WhatsApp ग्रुप बनाया गया, जिसे "डेविल्स ग्रुप ऑफ गोड्डा" नाम दिया गया. शुरुआत में इसमें सीमित सदस्य जुड़े, लेकिन समय के साथ इसमें लगातार नए लोग शामिल होते गए.
धीरे-धीरे बढ़ता गया नेटवर्क
स्थानीय चर्चाओं के मुताबिक, एक सदस्य दूसरे लोगों को जोड़ता गया और कुछ समय में ग्रुप का आकार काफी बड़ा हो गया. हालांकि इसमें कितने सदस्य थे, इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है. लॉकडाउन खत्म होने के बाद ग्रुप से जुड़े कई युवक एक साथ बाइक राइड और अन्य गतिविधियों में नजर आने लगे. इसी दौरान अलग-अलग घटनाओं में इस ग्रुप का नाम सामने आने लगा.
2022 के हत्याकांड के बाद पहली बार सुर्खियों में आया नाम
डेविल्स ग्रुप का नाम वर्ष 2022 में उस समय चर्चा में आया, जब गोड्डा में चंदन मंडल हत्याकांड की जांच के दौरान पुलिस ने इस ग्रुप का जिक्र किया. पुलिस के अनुसार, जांच में इस मामले में डेविल्स ग्रुप से जुड़े कुछ युवकों की संलिप्तता सामने आई. पुलिस ने इस केस में चंदन और दीपक नामक दो आरोपियों को गिरफ्तार किया था.
पुलिस का दावा था कि ये दोनों डेविल्स ग्रुप के प्रमुख सदस्यों में शामिल थे. मामले की जांच के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की गई.
कई जिलों तक फैले नेटवर्क की जांच
अब पुलिस का मानना है कि इस ग्रुप का नेटवर्क केवल गोड्डा तक सीमित नहीं रहा. जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि किन-किन जिलों तक इसके सदस्य सक्रिय रहे और किन लोगों का इससे संपर्क था.
चार जिलों की संयुक्त टीम करेगी जांच
पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए झारखंड पुलिस ने विशेष जांच की तैयारी शुरू कर दी है. जानकारी के अनुसार, गोड्डा, दुमका, देवघर और जामताड़ा पुलिस की संयुक्त टीम इस नेटवर्क की जांच करेगी. डीजीपी के निर्देश पर गठित इस विशेष टीम की निगरानी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी करेंगे. टीम का उद्देश्य पूरे नेटवर्क, उससे जुड़े लोगों और कथित आपराधिक गतिविधियों की जांच करना है.
पुलिस के सामने बड़ी चुनौती
करीब छह वर्षों में एक WhatsApp ग्रुप से शुरू हुआ यह मामला अब पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गया है. फिलहाल जांच जारी है और पुलिस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है. साथ ही सोशल मीडिया पर वायरल हथियारों की तस्वीरों और उनसे जुड़े दावों की भी जांच की जा रही है.