Jharkhand Finance Minister: झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कानून-व्यवस्था और सरकारी विभागों में लंबित फाइलों को लेकर सख्त रुख अपनाया है. उन्होंने कहा है कि सरकारी कामकाज में लापरवाही और फाइलों को अनावश्यक रूप से रोककर रखने की प्रवृत्ति स्वीकार नहीं की जाएगी.
वित्त मंत्री ने पुलिस व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि पुलिस विभाग किसी अधिकारी की निजी व्यवस्था नहीं, बल्कि सरकार के प्रति जवाबदेह संस्थान है. उन्होंने पुलिसकर्मियों, खासकर नक्सल प्रभावित इलाकों में तैनात जवानों को मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं पर चिंता जताई.
जवानों की सुविधाओं को लेकर उठाए सवाल
राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तैनात जवानों की स्थिति की नियमित समीक्षा होनी चाहिए. उन्होंने सवाल उठाया कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारी जवानों की जरूरतों और वहां उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी लेने के लिए कितनी बार ऐसे इलाकों में पहुंचे हैं.
मंत्री ने कहा कि जवानों के लिए कूलर जैसी बुनियादी सुविधा की व्यवस्था उन्हें अपने स्तर से करनी पड़ी. उनके अनुसार, यह जिम्मेदारी पुलिस विभाग की होनी चाहिए थी. उन्होंने विदेश से जनप्रतिनिधियों को मिल रही धमकियों का मुद्दा भी उठाया और पुलिस की कार्यक्षमता के साथ खुफिया तंत्र पर सवाल खड़े किए.
वित्त विभाग में फाइलों के अटकाव पर नजर
वित्त मंत्री ने विभागीय फाइलों को लंबे समय तक लंबित रखने वाले अधिकारियों को चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि किसी फाइल पर स्पष्टीकरण या क्वेरी मांगना प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन इसे काम रोकने का माध्यम नहीं बनाया जा सकता.
उन्होंने विभाग में लंबित फाइलों की निगरानी के लिए व्यवस्था बनाने का निर्देश दिया है. अब यह देखा जाएगा कि कौन सी फाइल किस अधिकारी के पास कितने दिनों से पड़ी है और उसके निस्तारण में देरी का कारण क्या है.
देरी के लिए जिम्मेदारी तय होगी
मंत्री ने कहा कि यदि किसी अधिकारी की वजह से फाइल जानबूझकर रोकी गई पाई गई, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. विभागीय अनुशासन को लेकर भी उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया है.
उन्होंने कहा कि प्रशासनिक पदानुक्रम का पालन जरूरी है. प्रशाखा पदाधिकारी द्वारा तय प्रक्रिया को दरकिनार कर सीधे आप्त सचिव को पत्र भेजना प्रशासनिक मर्यादा के विपरीत है. ऐसी कार्यशैली को आगे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.