Jharkhand News: झारखंड आंदोलन के वरिष्ठ नेता सूर्या सिंह बेसरा ने अपनी नई पुस्तक "आजसू 72: आत्मोत्सर्ग" के विमोचन के दौरान कई बड़े दावे किए हैं. उन्होंने कहा कि पुस्तक में झारखंड आंदोलन, अलग राज्य की मांग और उस दौर की राजनीति से जुड़े कई ऐसे घटनाक्रमों का जिक्र है, जो अब तक सार्वजनिक चर्चा से दूर रहे हैं.
बेसरा ने दावा किया कि 1991 में उन्हें राजनीतिक निर्णयों को प्रभावित करने के लिए तत्कालीन नेता लालू यादव की ओर से करोड़ों रुपये की पेशकश की गई थी, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया. उन्होंने कहा कि उस परिस्थिति में उन्होंने अपने पद से इस्तीफा देना बेहतर समझा.
दस्तावेज होने का किया दावा
सूर्या सिंह बेसरा ने कहा कि इस मामले से जुड़े कुछ दस्तावेज उनके पास मौजूद हैं. जरूरत पड़ने पर वे इन्हें कानूनी प्रक्रिया या सार्वजनिक मंच पर पेश कर सकते हैं. उन्होंने पूरे मामले की जांच की मांग भी उठाई.
आंदोलन के दबावों का किया जिक्र
झारखंड आंदोलन के दौर को याद करते हुए बेसरा ने कहा कि अलग राज्य की मांग को लेकर कई स्तरों पर दबाव बनाए गए थे. इसके बावजूद उन्होंने संविधान के प्रावधानों के आधार पर अपने विचार और आंदोलन की दिशा को कायम रखा.
उन्होंने कहा कि उस समय संगठन और आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ताओं को कई प्रशासनिक और राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा था.
आंदोलनकारियों की उपेक्षा का लगाया आरोप
बेसरा ने कहा कि झारखंड आंदोलन में योगदान देने वाले कई लोगों को आज भी उचित सम्मान और पहचान नहीं मिल सकी है. उन्होंने वर्तमान और पूर्व सरकारों पर आंदोलनकारियों की अनदेखी करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि अब झारखंड के भविष्य की जिम्मेदारी युवाओं को संभालनी चाहिए और संगठन में नई पीढ़ी को आगे बढ़ाने पर काम किया जाएगा.