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  • 2026-06-22

Jharkhand News: झारखंड में करोड़ों खर्च कर लगाए गए शराब फैक्ट्रियों के Flow Meter बेकार! दो साल बाद भी नहीं हुई रीडिंग, निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल

Jharkhand News: झारखंड में शराब उत्पादन में पारदर्शिता और हर बूंद शराब का हिसाब रखने के उद्देश्य से लगाए गए हाईटेक Flow Meter अब सवालों के घेरे में आ गए हैं. करोड़ों रुपये खर्च कर शराब फैक्ट्रियों में लगाए गए इन उपकरणों की अब तक उत्पाद विभाग की ओर से रीडिंग तक नहीं ली गई है. ऐसे में इनकी उपयोगिता और पूरी निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं.

उत्पादन में गड़बड़ी रोकने के लिए लगाया गया था सिस्टम
जानकारी के अनुसार, झारखंड उत्पाद नीति 2022 के तहत शराब निर्माण की पूरी प्रक्रिया पर नजर रखने के लिए स्विट्जरलैंड की कंपनी Endress+Hauser के Flow Meter लगाने का फैसला लिया गया था. इसका उद्देश्य शराब फैक्ट्रियों में होने वाले उत्पादन की सटीक निगरानी करना और किसी भी तरह की हेराफेरी को रोकना था.

इसके लिए राज्य की शराब निर्माता कंपनियों को करोड़ों रुपये खर्च करने पड़े. बताया जाता है कि एक Flow Meter की कीमत 50 लाख रुपये से अधिक थी और कई फैक्ट्रियों में एक से ज्यादा उपकरण लगाए गए. कुल मिलाकर कंपनियों पर 20 करोड़ रुपये से अधिक का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा.

छत्तीसगढ़ मॉडल पर बनी थी उत्पाद नीति
झारखंड में लागू उत्पाद नीति 2022 को छत्तीसगढ़ मॉडल के आधार पर तैयार किया गया था. नीति बनाने के लिए छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड के तत्कालीन प्रबंध निदेशक अरुणपति त्रिपाठी को सलाहकार बनाया गया था. उन्हें इसके लिए करीब एक करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था.

बाद में छत्तीसगढ़ शराब घोटाले मामले में उनका नाम सामने आया और प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उन्हें गिरफ्तार किया था. फिलहाल वह जमानत पर हैं.

कंपनियों ने जताई थी आपत्ति
Flow Meter लगाने के फैसले को लेकर शराब निर्माता कंपनियों ने विभाग के सामने आपत्ति भी दर्ज कराई थी. कंपनियों का कहना था कि किसी एक खास कंपनी के उपकरण को अनिवार्य करना उचित नहीं है, लेकिन विभाग ने उनकी मांग पर विचार नहीं किया. इसके बाद राज्य की कई शराब निर्माण इकाइयों में Flow Meter लगाए गए.

रखरखाव पर खर्च, लेकिन निगरानी नहीं
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन उपकरणों को करोड़ों रुपये खर्च कर लगाया गया, उनका इस्तेमाल ही नहीं हो रहा है. उत्पाद विभाग के अधिकारियों ने अब तक इनकी रीडिंग नहीं ली है.
वहीं, शराब कंपनियों को इन उपकरणों के रखरखाव पर हर साल लाखों रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं. ऐसे में कंपनियों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है, जबकि जिस निगरानी उद्देश्य से यह व्यवस्था बनाई गई थी, वह पूरा होता नजर नहीं आ रहा है.

कई फैक्ट्रियों में लगे हैं Flow Meter
राज्य की कई शराब उत्पादन इकाइयों में यह सिस्टम लगाया गया है, जिनमें Ankur Biochem Pvt. Ltd., Silica Bottling and Blending Enterprise, Saffron Bottlers Pvt. Ltd., Ajanta Bottlers Pvt. Ltd., Gemini Bottlers Pvt. Ltd., Akriti Beverages Pvt. Ltd., Tarangani Liquors Pvt. Ltd., Bokaro Distillery Pvt. Ltd., Blackbrew Beverages Pvt. Ltd., Globus Spirits Ltd., SNJ Pvt. Ltd., Srilab Breweries Pvt. Ltd. समेत अन्य कंपनियां शामिल हैं.

अब सवाल यह है कि जब करोड़ों रुपये खर्च कर निगरानी के लिए व्यवस्था तैयार की गई थी, तो उसकी नियमित जांच और उपयोग क्यों नहीं हो रहा है. यह मामला उत्पाद विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर रहा है.
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