Jharkhand News: झारखंड में लगातार बढ़ती बिजली मांग और डीवीसी कमांड एरिया में आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए राज्य सरकार ने तैयारी तेज कर दी है. इसी कड़ी में झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (जेबीवीएनएल) ने पतरातू ताप विद्युत परियोजना (PTPS) की दूसरी यूनिट से जल्द बिजली उपलब्ध कराने का आग्रह किया है.
ऊर्जा सचिव के. श्रीनिवासन के निर्देश पर जेबीवीएनएल के महाप्रबंधक संजय कुमार सिंह ने पीवीयूएनएल को पत्र भेजकर यूनिट-2 से जल्द बिजली सप्लाई शुरू करने की मांग की है.
800 मेगावाट की यूनिट से राज्य को मिलेगा बड़ा फायदा
पतरातू परियोजना की दूसरी यूनिट की उत्पादन क्षमता 800 मेगावाट है. इसमें से करीब 680 मेगावाट बिजली झारखंड को मिलने की संभावना है. फिलहाल यूनिट का कॉमर्शियल ऑपरेशन डेट (COD) ट्रायल चल रहा है.
पीवीयूएनएल की ओर से जेबीवीएनएल को बताया गया है कि परियोजना से जुड़े बाकी काम तेजी से पूरे किए जा रहे हैं. संभावना जताई जा रही है कि जून के अंत या जुलाई से राज्य को इस यूनिट से बिजली मिलनी शुरू हो सकती है.
मौसम के साथ बदल रही बिजली की मांग
राज्य में तापमान, बारिश और मौसम में बदलाव के कारण बिजली की मांग में लगातार उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है. वर्तमान में राज्य की मांग करीब 2000 से 3000 मेगावाट के बीच बनी हुई है. बढ़ती मांग को देखते हुए जेबीवीएनएल लगातार बिजली उपलब्धता मजबूत करने की कोशिश कर रहा है. इसी क्रम में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल को पत्र लिखकर डीवीसी कमांड एरिया में अतिरिक्त 200 मेगावाट बिजली उपलब्ध कराने का आग्रह किया था.
यूनिट-2 शुरू होने से डीवीसी क्षेत्र को भी राहत
पतरातू परियोजना की पहली यूनिट से पहले से ही राज्य को 680 मेगावाट बिजली मिल रही है. दूसरी यूनिट चालू होने के बाद झारखंड की कुल बिजली उपलब्धता में बड़ा सुधार होगा. इससे खासकर धनबाद, बोकारो, हजारीबाग, गिरिडीह, कोडरमा, रामगढ़ और चतरा जैसे डीवीसी कमांड एरिया वाले जिलों में बिजली आपूर्ति व्यवस्था मजबूत होने की उम्मीद है.
सात जिलों की बिजली व्यवस्था सुधारने की योजना
डीवीसी क्षेत्र में बिजली संकट के स्थायी समाधान के लिए हाल ही में हुई समीक्षा बैठक में एक अहम फैसला लिया गया. इसमें डीवीसी और जेबीवीएनएल के संयुक्त सहयोग से सात जिलों में बिजली वितरण व्यवस्था सुधारने के लिए ज्वाइंट वेंचर बनाने पर सहमति बनी.
यह संयुक्त उद्यम धनबाद, बोकारो, हजारीबाग, गिरिडीह, कोडरमा, रामगढ़ और चतरा जिलों की बिजली व्यवस्था का अध्ययन कर सुधार की योजना तैयार करेगा. ऊर्जा सचिव के. श्रीनिवासन जल्द ही दिल्ली जाकर इस दिशा में आगे की रणनीति पर संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे.
अगर पतरातू यूनिट-2 तय समय पर शुरू होती है, तो आने वाले दिनों में झारखंड में बिजली उपलब्धता और आपूर्ति दोनों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है.