Russia Ukraine War: रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में अब ऊर्जा क्षेत्र सबसे अहम मोर्चा बनता जा रहा है. यूक्रेन ने रूस के अंदर करीब 2000 किलोमीटर दूर स्थित ट्युमेन ऑयल रिफाइनरी को निशाना बनाया है. इसके बाद रूस के कई हिस्सों में ईंधन की उपलब्धता प्रभावित हुई है और पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं. इस बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने दावा किया है कि देश ने ऐसे नए ड्रोन तैयार किए हैं, जो 3000 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक हमला करने में सक्षम हैं. ट्युमेन रिफाइनरी रूस के सबसे बड़े निजी तेल संयंत्रों में शामिल है और यहां रोजाना करीब 1.51 लाख बैरल कच्चे तेल का प्रसंस्करण किया जाता है.
ईंधन की कमी के चलते कई क्षेत्रों में बिक्री पर लगाई गई सीमा
यूक्रेनी हमलों का असर अब रूस और उसके कब्जे वाले इलाकों में दिखाई देने लगा है. रिपोर्टों के अनुसार 53 क्षेत्रों में पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर अलग अलग तरह की पाबंदियां लगाई गई हैं. कई स्थानों पर वाहन चालकों को एक बार में सिर्फ एक टैंक या अधिकतम 50 लीटर ईंधन खरीदने की अनुमति दी जा रही है. कुछ इलाकों में लोगों को कई घंटे तक अपनी बारी का इंतजार करना पड़ रहा है. क्रीमिया में स्थिति को संभालने के लिए प्रशासन ने क्यूआर कोड के जरिए ईंधन वितरण की व्यवस्था शुरू की है.
मॉस्को समेत कई रिफाइनरियां बनी निशाना, क्षमता पर पड़ा असर
यूक्रेन ने 16 जून और 18 जून को मॉस्को की प्रमुख तेल रिफाइनरी पर भी हमला किया. उद्योग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक इन हमलों में दो अहम क्रूड डिस्टिलेशन यूनिट प्रभावित हुई हैं, जिन पर रिफाइनरी की लगभग पूरी क्षमता निर्भर करती है. अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अनुसार यूक्रेनी ड्रोन और मिसाइल हमलों से रूस की करीब 20 फीसदी तेल रिफाइनिंग क्षमता प्रभावित हुई है. विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार हो रहे हमलों से घरेलू ईंधन आपूर्ति बनाए रखना रूस के लिए चुनौती बन सकता है. इसी वजह से सरकार ने जेट फ्यूल के निर्यात पर रोक लगा दी है और ऐसे ईंधन की घरेलू बिक्री की अवधि बढ़ा दी है, जो यूरो 5 मानकों को पूरा नहीं करते.
ऊर्जा ढांचे पर बढ़ते हमलों से बदल रहा युद्ध का स्वरूप
रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष अब केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं है. यूक्रेन लगातार तेल रिफाइनरियों, ऊर्जा ढांचे और सप्लाई नेटवर्क को निशाना बना रहा है. इसका असर अब आम लोगों तक पहुंचने लगा है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह हमले जारी रहे, तो रूस के कई हिस्सों में ईंधन संकट और गंभीर हो सकता है.