Jamshedpur: आपदा की स्थिति में त्वरित, सुरक्षित और प्रभावी राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चित करने के उद्देश्य से गुरुवार को डिमना लेक डैम परिसर में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) द्वारा सिविल डिफेंस वॉलंटियर्स के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। सुबह 8 बजे शुरू हुए इस प्रशिक्षण शिविर में स्वयंसेवकों को आपदा प्रबंधन से जुड़ी विभिन्न तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान एनडीआरएफ के विशेषज्ञ प्रशिक्षकों ने स्वयंसेवकों को गोताखोरी, जल बचाव अभियान, आत्मरक्षा, प्राथमिक उपचार तथा आपदा प्रबंधन की आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी। उन्हें बाढ़, डूबने की घटनाओं और अन्य आपात परिस्थितियों में राहत एवं बचाव कार्यों को सुरक्षित और प्रभावी ढंग से संचालित करने के तरीके सिखाए गए।
बचाव उपकरणों के उपयोग का किया गया प्रदर्शन
एनडीआरएफ टीम ने लाइफ जैकेट, रस्सी, फ्लोटिंग डिवाइस समेत विभिन्न बचाव उपकरणों के उपयोग का प्रदर्शन किया। प्रशिक्षकों ने बताया कि सीमित संसाधनों में भी किस प्रकार प्रभावी रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा सकता है और संकटग्रस्त लोगों तक समय पर सहायता पहुंचाई जा सकती है। प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों ने कहा कि किसी भी आपदा में राहतकर्मी और बचावकर्ता की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए आत्मरक्षा, जोखिम का आकलन, मानसिक संतुलन बनाए रखने, टीम वर्क और सुरक्षा मानकों के पालन पर विशेष जोर दिया गया।
मॉक ड्रिल के जरिए कराया गया वास्तविक अनुभव
कार्यक्रम के दौरान मॉक ड्रिल का आयोजन कर स्वयंसेवकों को वास्तविक आपदा जैसी परिस्थितियों का अनुभव कराया गया। प्रशिक्षकों ने बताया कि केवल सैद्धांतिक जानकारी पर्याप्त नहीं होती, बल्कि नियमित अभ्यास और व्यावहारिक प्रशिक्षण ही किसी व्यक्ति को कुशल बचावकर्ता बनाता है। एनडीआरएफ अधिकारियों ने कहा कि बढ़ती प्राकृतिक और मानवजनित आपदाओं को देखते हुए प्रशिक्षित सिविल डिफेंस वॉलंटियर्स की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित स्वयंसेवक प्रशासन और एनडीआरएफ के साथ मिलकर राहत एवं बचाव कार्यों को अधिक प्रभावी और तेज बना सकते हैं।
सेवा और जिम्मेदारी का लिया संकल्प
प्रशिक्षण के समापन पर स्वयंसेवकों ने भविष्य में किसी भी आपदा की स्थिति में जिम्मेदारीपूर्वक सेवा देने का संकल्प लिया। डिमना लेक में आयोजित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम जागरूक, सक्षम और प्रशिक्षित नागरिक तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।