Jamshedpur: टाटा स्टील के करीब 10 हजार स्थायी कर्मचारियों के वेतन पुनरीक्षण समझौते में लगातार हो रही देरी अब यूनियन के अंदर भी चर्चा और असंतोष का विषय बनती जा रही है। डेढ़ वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद समझौते पर अंतिम निर्णय नहीं होने से कर्मचारियों के बीच नाराजगी बढ़ रही है। इसी मुद्दे को लेकर बुधवार शाम टाटा वर्कर्स यूनियन के वरिष्ठ पदाधिकारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें वेतन वार्ता की वर्तमान स्थिति पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक के दौरान यूनियन के डिप्टी प्रेसिडेंट शैलेश सिंह ने पदाधिकारियों को कंपनी प्रबंधन के साथ चल रही बातचीत की ताजा जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पिछले कई महीनों से दोनों पक्षों के बीच लगातार बातचीत हो रही है, लेकिन अब तक किसी ठोस सहमति तक नहीं पहुंचा जा सका है। सूत्रों के अनुसार, कंपनी प्रबंधन वेतन समझौते की अवधि आठ वर्ष रखने और 7.50 प्रतिशत न्यूनतम गारंटीड लाभ (एमजीबी) के प्रस्ताव पर कायम है। प्रबंधन का कहना है कि पहले इस बिंदु पर सहमति बननी चाहिए, उसके बाद अन्य श्रेणियों के कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों पर आगे चर्चा संभव होगी।
18 महीने की देरी पर उठे सवाल
बैठक में मौजूद कई पदाधिकारियों ने वेतन समझौते में हो रही लंबी देरी पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने सवाल उठाया कि जब समझौता काफी समय से लंबित है, तो अब तक कोई निर्णायक परिणाम क्यों नहीं निकल पाया। पदाधिकारियों का मानना था कि कर्मचारियों की उम्मीदें यूनियन नेतृत्व से जुड़ी हुई हैं और ऐसे में समझौते को अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रहने दिया जा सकता।
उन्होंने कहा कि यदि कर्मचारियों के हितों की अनदेखी होती है तो नेतृत्व को सख्त रुख अपनाने से पीछे नहीं हटना चाहिए। बैठक के दौरान कुछ पदाधिकारियों ने स्पष्ट रूप से कहा कि कर्मचारियों को किसी भी कीमत पर ऐसा समझौता स्वीकार नहीं होना चाहिए, जिससे भविष्य में नुकसान उठाना पड़े। उन्होंने यूनियन नेतृत्व को भरोसा दिलाया कि कर्मचारियों के अधिकारों और बेहतर लाभ के लिए उठाए जाने वाले हर कदम में वे पूरी मजबूती के साथ साथ खड़े रहेंगे।
न्यू सीरीज कर्मचारियों के लिए विशेष पहल की मांग
चर्चा के दौरान न्यू सीरीज श्रेणी के कर्मचारियों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। पदाधिकारियों ने कहा कि इन कर्मचारियों का वेतन स्तर अपेक्षाकृत कम है, इसलिए उनके लिए अलग दृष्टिकोण अपनाते हुए विशेष रूप से प्रबंधन से बातचीत की जानी चाहिए। इसके अलावा वेतन समझौते की अवधि को लेकर भी सुझाव सामने आए। कई पदाधिकारियों ने आठ वर्ष की अवधि को अधिक बताते हुए इसे पांच से छह वर्ष के बीच रखने की आवश्यकता जताई।
बैठक के अंत में डिप्टी प्रेसिडेंट शैलेश सिंह ने पदाधिकारियों को आश्वस्त किया कि कर्मचारियों से जुड़े सभी महत्वपूर्ण सुझावों और चिंताओं को प्रबंधन के समक्ष मजबूती से रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि यूनियन कर्मचारियों के हितों से कोई समझौता नहीं करेगी और सम्मानजनक वेतन समझौते के लिए प्रयास जारी रहेंगे। बैठक में यूनियन के कई वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे और सभी ने एकजुट होकर कर्मचारियों के हितों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। अब कर्मचारियों की नजर आगामी दौर की वार्ताओं पर टिकी हुई है, जहां वेतन समझौते को लेकर कोई महत्वपूर्ण प्रगति सामने आ सकती है।