लोकसभा स्पीकर से मुलाकात के बाद बागी सांसदों ने खोले अपने पत्ते
रविवार को बागी सांसदों का एक समूह दिल्ली में सक्रिय नजर आया. बीजेपी नेता भूपेंद्र यादव के आवास पर बैठक के बाद सभी सांसद लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मिले. इस मुलाकात के बाद सांसदों ने अलग बैठने की मांग से जुड़ा पत्र स्पीकर को सौंपा और अपने अगले राजनीतिक कदम की जानकारी सार्वजनिक की.
काकोली घोष ने कहा, हमारे पास दो तिहाई से ज्यादा सांसदों का समर्थन
बागी गुट की प्रमुख चेहरा काकोली घोष दस्तीदार ने दावा किया कि AITC के टिकट पर चुने गए 20 सांसद उनके साथ हैं और यह संख्या पार्टी के कुल सांसदों के दो तिहाई से अधिक है. उन्होंने कहा कि इसी आधार पर उनके समूह ने नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया में विलय का फैसला लिया है.
काकोली घोष के मुताबिक, यह फैसला संवैधानिक और कानूनी जटिलताओं से बचने को ध्यान में रखकर लिया गया है. उन्होंने कहा कि आगे उनका समूह देशहित में काम करेगा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले NDA के साथ सहयोग करेगा.
पूर्वोत्तर और बंगाल में मौजूदगी रखने वाली पार्टी में हुआ विलय
जिस NCPI में बागी सांसदों ने शामिल होने की घोषणा की है, उसकी मौजूदगी असम, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल समेत कई पूर्वोत्तर राज्यों में बताई जाती है. बागी नेताओं का मानना है कि क्षेत्रीय पार्टी में विलय का रास्ता अपनाने से उन्हें कानूनी प्रक्रिया में मजबूती मिलेगी.
जुलाई में तृणमूल कांग्रेस के नाम और प्रतीक पर दावा करने की तैयारी
बागी सांसद और वरिष्ठ नेता सुदीप बंदोपाध्याय ने कहा कि फिलहाल उनका समूह NCPI के साथ विलय की प्रक्रिया पूरी करेगा. उन्होंने कहा कि नियमों के तहत अलग होते ही मूल पार्टी के नाम पर दावा नहीं किया जा सकता.
सुदीप बंदोपाध्याय के अनुसार, जुलाई में उनका गुट तृणमूल कांग्रेस के नाम पर दावा पेश करेगा क्योंकि उनके पास पार्टी के दो तिहाई सांसदों का समर्थन होने का दावा है. उन्होंने कहा कि अंतिम फैसला न्यायालय और संवैधानिक प्रक्रियाओं के तहत होगा.
शत्रुघ्न सिन्हा और कीर्ति आजाद को लेकर भी किया गया तंज
बागी नेताओं ने लोकसभा स्पीकर के सामने 20 सांसदों के हस्ताक्षरों की पुष्टि होने का दावा किया. इसी दौरान टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद और शत्रुघ्न सिन्हा का नाम लेते हुए तंज भी कसा गया. बागी खेमे की ओर से कहा गया कि बिहार से आने वाले नेता बंगाल की पार्टी के लिए अधिक सक्रिय दिखाई देते हैं.
बंगाल की राजनीति में बढ़ सकती है हलचल
टीएमसी के भीतर सामने आए इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है. यदि बागी सांसदों के दावे सही साबित होते हैं तो आने वाले दिनों में पार्टी के भीतर शक्ति संतुलन और कानूनी लड़ाई दोनों तेज हो सकती हैं. जुलाई में तृणमूल कांग्रेस के नाम और राजनीतिक पहचान को लेकर होने वाला दावा इस पूरे विवाद का सबसे अहम पड़ाव माना जा रहा है.