Jharkhand: झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन-SIR) की प्रक्रिया जारी है। चुनाव आयोग की इस कवायद को लेकर राज्य में राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और कांग्रेस के बीच इस मुद्दे पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।बीजेपी के राज्यसभा सांसद दीपक प्रकाश ने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण चुनाव आयोग की एक नियमित और आवश्यक प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची को शुद्ध, पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाना है। उन्होंने कहा कि यह कोई नई व्यवस्था नहीं है, बल्कि अतीत में भी समय-समय पर ऐसी प्रक्रियाएं अपनाई जाती रही हैं।
दीपक प्रकाश ने आरोप लगाया कि झामुमो और कांग्रेस तुष्टिकरण की राजनीति कर रहे हैं तथा अवैध घुसपैठियों को संरक्षण देकर उन्हें वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में केवल वास्तविक और पात्र मतदाताओं का नाम होना चाहिए। बीजेपी नेताओं का कहना है कि चुनाव आयोग की इस प्रक्रिया का विरोध करने वाले राजनीतिक दल जनता को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं। पार्टी का दावा है कि मतदाता सूची को पारदर्शी बनाने की पहल का विरोध करने वालों को आने वाले समय में जनता उचित जवाब देगी।
कांग्रेस ने आरोपों को किया खारिज
वहीं कांग्रेस ने बीजेपी के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए पलटवार किया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय ने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण के नाम पर वैध मतदाताओं को परेशान किया जा रहा है और उनके मतदान के अधिकारों को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।सुबोध कांत सहाय ने कहा कि बीजेपी हर चुनाव में घुसपैठ का मुद्दा उठाती है, लेकिन अब तक इसके समर्थन में कोई ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर पाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए किया जा रहा है। कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि वह मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से अपना संघर्ष जारी रखेगी।
राज्य में गरमाई राजनीतिक बहस
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर राज्य में राजनीतिक बहस लगातार तेज होती जा रही है। एक ओर बीजेपी इसे मतदाता सूची को शुद्ध और पारदर्शी बनाने की प्रक्रिया बता रही है, वहीं कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इसे आम मतदाताओं के अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बताते हुए सवाल उठा रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा राज्य की राजनीति में और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है।