Jharkhand News: मैट्रिक परीक्षा देने वाले छात्र को तीन दिनों तक कथित रूप से अवैध हिरासत में रखने और यातना देने के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. अदालत ने चतरा एसपी से पूछा है कि मामले में जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई है.
अख्तारी खातून की ओर से दायर हेबियस कॉरपस याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने चतरा एसपी को दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई की रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है.
पुलिस पर लगा छात्र को तीन दिन तक थाने में रखने का आरोप
मामला चतरा जिले के लावालौंग और टंडवा थाना क्षेत्र से जुड़ा है. आरोप है कि पुलिस ने 19 वर्षीय मैट्रिक परीक्षार्थी को तीन दिनों तक हिरासत में रखा, जिसके कारण उसकी परीक्षा छूट गई. परिजनों ने आरोप लगाया कि इस दौरान छात्र के साथ शारीरिक यातना भी दी गई.
पुलिस की ओर से दावा किया गया था कि छात्र के पास से एक संदिग्ध मोबाइल बरामद हुआ था, जिसके प्रतिबंधित संगठन पीएलएफआई से जुड़े होने की आशंका थी. इसी आधार पर उससे पूछताछ के लिए उसे हिरासत में लिया गया था.
हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्रवाई पर जताई थी नाराजगी
सुनवाई के दौरान अदालत ने पहले भी पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे. कोर्ट ने कहा था कि किसी भी व्यक्ति को हिरासत में लेने के बाद कानून के अनुसार 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना जरूरी है. बिना कानूनी प्रक्रिया के किसी को लंबे समय तक हिरासत में रखना पूरी तरह गैरकानूनी है.
संदिग्ध मोबाइल जांच के लिए केंद्र और एनआईए को बनाया पक्षकार
मामले में बरामद संदिग्ध मोबाइल की जांच को लेकर केंद्र सरकार और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को भी प्रतिवादी बनाया गया है. हाईकोर्ट अब इस मामले में पुलिस कार्रवाई और जांच की प्रगति पर नजर रख रहा है.