Hazaribhag News: हजारीबाग के बानादाग इलाके में मंगलवार सुबह उस समय अफरा तफरी का माहौल बन गया, जब जमीन के दाखिल खारिज की प्रक्रिया पूरी नहीं होने से नाराज एक युवक एयरटेल के मोबाइल टावर पर चढ़ गया. करीब 100 फीट ऊंचे टावर पर खड़े युवक ने चेतावनी दी कि यदि उसकी समस्या का समाधान नहीं किया गया तो वह ऊपर से कूद जाएगा. सूचना मिलने के बाद पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और काफी समझाने बुझाने के बाद युवक को सुरक्षित नीचे उतारा गया.
छह महीने से दाखिल खारिज के लिए लगा रहा था कार्यालय के चक्कर
जानकारी के अनुसार युवक की पहचान चतरा जिले के टंडवा प्रखंड स्थित कटही गांव निवासी विकास कुमार के रूप में हुई है. विकास ने कटकमदाग अंचल क्षेत्र के फतहा गांव में जमीन खरीदी थी. जमीन खरीदने के बाद उसने दाखिल खारिज के लिए आवेदन दिया था, लेकिन उसका आरोप है कि पिछले छह महीने से उसका मामला लंबित है.
विकास का कहना है कि वह लगातार संबंधित कार्यालय के चक्कर लगा रहा था, लेकिन हर बार उसे अलग अलग कारण बताकर वापस भेज दिया जाता था. कभी फाइल प्रक्रिया में होने की बात कही जाती तो कभी अन्य औपचारिकताओं का हवाला दिया जाता था.
नाराज होकर सीधे चढ़ गया एयरटेल के टावर पर
मंगलवार सुबह अपनी समस्या का समाधान नहीं होने से परेशान विकास बानादाग स्थित एयरटेल के मोबाइल टावर पर चढ़ गया. टावर पर युवक को देखकर आसपास के लोगों में हड़कंप मच गया. देखते ही देखते मौके पर बड़ी संख्या में लोग जुट गए और राहगीरों की भीड़ लग गई.
टावर के ऊपर खड़े युवक ने अपनी समस्या को लेकर आवाज उठाई और कहा कि यदि उसका दाखिल खारिज नहीं किया गया तो वह अपनी जान दे देगा. नीचे मौजूद लोग लगातार उसे समझाने का प्रयास करते रहे, लेकिन वह अपनी मांग पर अड़ा रहा.
पुलिस और प्रशासन ने बातचीत कर शांत कराया मामला
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे. अधिकारियों ने युवक से बातचीत की और उसकी समस्या का समाधान कराने का भरोसा दिया. काफी देर तक चली बातचीत और समझाइश के बाद विकास टावर से नीचे उतरने को तैयार हुआ.
युवक के सुरक्षित नीचे आने के बाद प्रशासन और स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली. घटना के दौरान इलाके में काफी देर तक लोगों की भीड़ जुटी रही.
व्यवस्था पर उठे सवाल, स्थानीय लोगों ने जताई नाराजगी
घटना के बाद इलाके में दाखिल खारिज से जुड़े मामलों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को लेकर चर्चा तेज हो गई. स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय पर युवक की बात सुनी जाती और उसके आवेदन पर कार्रवाई होती, तो उसे अपनी समस्या बताने के लिए इतना बड़ा कदम नहीं उठाना पड़ता.
लोगों का मानना है कि एक सामान्य राजस्व संबंधी काम के लिए किसी व्यक्ति को अपनी जान जोखिम में डालने की नौबत आना व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है.
बानादाग में हुई यह घटना केवल एक व्यक्ति की परेशानी नहीं, बल्कि सरकारी प्रक्रियाओं में देरी से होने वाली आम लोगों की कठिनाइयों को भी सामने लाती है. फिलहाल प्रशासन के आश्वासन के बाद मामला शांत हो गया है, लेकिन इस घटना ने दाखिल खारिज जैसी बुनियादी प्रक्रियाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने की जरूरत को फिर से उजागर कर दिया है.