Tata Steel Wage Revision: टाटा स्टील में कर्मचारियों के लंबित ग्रेड रिवीजन (वेतन समझौता) पर एक बार फिर सहमति नहीं बन सकी. 1 जनवरी 2025 से लंबित इस समझौते में मिनिमम गारेंटीड बेनीफिट (MGB) का प्रतिशत सबसे बड़ा मुद्दा बनकर सामने आया है.
बुधवार को टाटा स्टील प्रबंधन और टाटा वर्कर्स यूनियन के शीर्ष नेतृत्व के बीच इसको लेकर दो चरणों में लंबी बैठक हुई. करीब छह घंटे तक चली चर्चा के बाद भी दोनों पक्ष MGB के आंकड़े पर एकमत नहीं हो सके.
बैठक का पहला सत्र सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक चला, जबकि दूसरा दौर शाम 4 बजे से 6 बजे तक हुआ. इस दौरान वेतन समझौते के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई, लेकिन MGB पर गतिरोध बरकरार रहा.
MGB को लेकर दोनों पक्षों की अलग-अलग मांग
सूत्रों के अनुसार, कंपनी प्रबंधन फिलहाल 8 प्रतिशत से अधिक MGB देने के पक्ष में नहीं है. वहीं टाटा वर्कर्स यूनियन पिछली बार की तर्ज पर 12.75 प्रतिशत या उससे अधिक MGB की मांग पर कायम है.
यूनियन का कहना है कि अपर बेसिक पर डीए सीलिंग लागू होने से कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान हुआ है. ऐसे में इस नुकसान की भरपाई के लिए MGB को बढ़ाना जरूरी है. यूनियन नेतृत्व का तर्क है कि पिछली व्यवस्था के मुकाबले कम लाभ कर्मचारियों के हित में नहीं होगा.
हालांकि, बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए यूनियन की ओर से पुराने पैटर्न को देखते हुए कुछ कमी पर विचार किए जाने की भी चर्चा है.
7 जून के बाद साफ हो सकती है स्थिति
ग्रेड रिवीजन को लेकर अब सबकी नजर कंपनी की चीफ पीपल ऑफिसर अत्रेयी सान्याल के जमशेदपुर दौरे पर है. बताया जा रहा है कि वह 7 जून को शहर पहुंचेंगी. उनके आने के बाद वार्ता में आगे की दिशा तय होने की संभावना है.
बुधवार की बैठक में प्रबंधन की ओर से सीएचआरओ जुबिन पालिया और राहुल दुबे शामिल हुए. वहीं यूनियन की तरफ से अध्यक्ष संजीव कुमार चौधरी, महासचिव सतीश सिंह और डिप्टी प्रेसिडेंट शैलेश सिंह ने कर्मचारियों का पक्ष रखा.