Jharkhand: राजधानी रांची स्थित बीजेपी प्रदेश कार्यालय में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने प्रेस वार्ता कर राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पिछले छह वर्षों में हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार में कानून व्यवस्था, विकास कार्य और प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हुई है, जिसकी सबसे बड़ी वजह भ्रष्टाचार है।
“हर विभाग से सामने आ रही अनियमितताओं की शिकायतें”
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि राज्य में भ्रष्टाचार इस स्तर तक बढ़ चुका है कि लगभग हर विभाग से अनियमितताओं की शिकायतें सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि लोग लगातार उन्हें फोटो और दस्तावेज भेजते हैं, जिन्हें वह सोशल मीडिया और पत्रों के माध्यम से सरकार तक पहुंचाते हैं। इसके बावजूद सरकार भ्रष्टाचार रोकने के बजाय उसे संरक्षण देने का काम कर रही है।
ट्रेजरी घोटाले की निष्पक्ष जांच पर उठाए सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि ट्रेजरी घोटाले में लगातार सरकारी खजाने से पैसे की निकासी हो रही है, लेकिन निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं की जा सकती, क्योंकि जिन अधिकारियों पर सवाल उठ रहे हैं, वे अब भी अपने पदों पर बने हुए हैं।
स्वास्थ्य विभाग और JMHIDPCL पर लगाए गंभीर आरोप
मरांडी ने स्वास्थ्य विभाग में कथित भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाते हुए कहा कि Jharkhand Medical and Health Infrastructure Development and Procurement Corporation Limited में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि शैलेंद्र श्रीवास्तव नामक कंसल्टेंट को नियमों के विरुद्ध सेवा विस्तार दिया गया।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2016 के नियमों के अनुसार किसी सेवानिवृत्त व्यक्ति को अधिकतम तीन वर्षों तक ही नियुक्त किया जा सकता है और आगे विस्तार के लिए मंत्रिमंडल या मुख्यमंत्री की अनुमति आवश्यक होती है। इसके बावजूद बिना मुख्यमंत्री की स्वीकृति के चौथे और पांचवें वर्ष के लिए सेवा विस्तार दिया गया।
एंबुलेंस खरीद में अनियमितता का आरोप
बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि इसी पद के जरिए टेंडर और खरीद प्रक्रियाओं को प्रभावित किया गया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 में 237 नई कस्टमाइज एंबुलेंस की खरीद के लिए 80 करोड़ रुपये की निविदा जारी की गई, जबकि वर्ष 2022 में खरीदी गई 206 एंबुलेंस, जिनकी लागत करीब 55.8 करोड़ रुपये थी, उनका उपयोगिता ऑडिट तक नहीं कराया गया।
उन्होंने दावा किया कि कई एंबुलेंस एक वर्ष से अधिक समय तक बिना उपयोग के खड़ी रहीं। साथ ही ऑडिट में यह भी सामने आया कि जिस कंपनी को टेंडर दिया गया, वह निर्धारित वार्षिक टर्नओवर की शर्त पूरी नहीं करती थी।
“करोड़ों की दवाइयां हुईं खराब”
दवाइयों की खरीद और भंडारण में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए मरांडी ने कहा कि ऑडिट के दौरान करोड़ों रुपये की जीवन रक्षक दवाइयां एक्सपायर मिलीं। उन्होंने बताया कि गोदामों में करीब 24 लाख यूनिट दवाएं खराब हो गईं, जबकि ई-औषधि सॉफ्टवेयर में एक्सपायरी अलर्ट और मॉनिटरिंग जैसी सुविधाएं मौजूद थीं।
CBI जांच और दोबारा ऑडिट की मांग
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यह पूरा मामला सिस्टम में फैले भ्रष्टाचार और लापरवाही को दर्शाता है। उन्होंने मांग की कि JMHIDPCL का दोबारा विस्तृत ऑडिट कराया जाए और पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराई जाए, ताकि सच्चाई जनता के सामने आ सके।