Ranchi News: राजधानी रांची के राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) की अधिग्रहीत जमीन से जुड़े करोड़ों रुपये के फर्जीवाड़ा मामले में जेल में बंद मुख्य आरोपियों को राहत नहीं मिली है. मामले के आरोपी राजकिशोर बड़ाइक और कार्तिक बढ़ाईक की जमानत याचिका पर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की विशेष अदालत में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई. इस दौरान एसीबी की ओर से दोनों आरोपियों की जमानत याचिका के विरोध में अपना आधिकारिक जवाब (काउंटर एफिडेविट) कोर्ट में दाखिल कर दिया गया. अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद मामले की अगली सुनवाई के लिए 26 मई 2026 की तिथि निर्धारित की है.
फर्जी वंशावली बनाकर हड़प ली थी रिम्स की 9.65 एकड़ जमीन
यह पूरा मामला वर्ष 1964-65 में रिम्स के लिए अधिग्रहीत की गई करीब 9.65 एकड़ सरकारी जमीन से जुड़ा हुआ है. एसीबी की जांच में यह खुलासा हुआ है कि सभी आरोपियों ने आपस में मिलीभगत कर इस कीमती सरकारी जमीन को निजी संपत्ति साबित करने के लिए फर्जी वंशावली और जाली दस्तावेज तैयार किए थे. इसके बाद आरोपियों ने सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा जमाकर उस पर धड़ल्ले से कई अपार्टमेंट, दुकानें और आलीशान मकान भी खड़े कर दिए थे.
हाई कोर्ट के आदेश पर जनवरी में दर्ज हुई थी एसीबी की एफआईआर
झारखंड हाई कोर्ट के कड़े निर्देश के बाद भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने इस महाघोटाले पर संज्ञान लेते हुए 5 जनवरी 2026 को एक आधिकारिक प्राथमिकी दर्ज की थी. इसके बाद मामले की गंभीरता और सबूतों के आधार पर कार्रवाई करते हुए एसीबी की टीम ने 7 अप्रैल को संयुक्त छापेमारी कर राजकिशोर बड़ाइक, कार्तिक बढ़ाईक, राजेश झा और चेतन कुमार को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था, जो फिलहाल सलाखों के पीछे हैं.