Bengal Politics: पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता एक बार फिर तनाव और हिंसा की खबरों को लेकर चर्चा में है. रविवार को पार्क सर्कस इलाके में अतिक्रमण हटाने पहुंची पुलिस और सुरक्षा बलों पर अचानक पथराव शुरू हो गया. इस हिंसा में 6 पुलिसकर्मी और 2 सीआरपीएफ जवान घायल हो गए. घटना के बाद इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया और अब तक 40 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. इस पूरे मामले ने बंगाल की राजनीति को भी गर्म कर दिया है, जहां एक तरफ सरकार सख्त कार्रवाई की बात कर रही है, वहीं विपक्ष बुलडोजर राजनीति और प्रशासनिक रवैये पर सवाल उठा रहा है.
अतिक्रमण हटाने के विरोध में भड़का प्रदर्शन
जानकारी के मुताबिक पार्क सर्कस इलाके में बड़ी संख्या में लोग प्रशासन की अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई का विरोध कर रहे थे. प्रदर्शनकारी सड़क जाम करने की कोशिश कर रहे थे. जब पुलिस और सुरक्षा बल मौके पर पहुंचे और रास्ता खाली कराने का प्रयास किया गया, तभी माहौल अचानक बिगड़ गया. भीड़ की ओर से सुरक्षा बलों पर पथराव शुरू कर दिया गया. स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए पुलिस को अतिरिक्त बल बुलाना पड़ा. हिंसा के दौरान कई पुलिसकर्मी और सीआरपीएफ जवान घायल हुए.
तिलजला फैक्ट्री आग के बाद शुरू हुई थी बुलडोजर कार्रवाई
दरअसल पिछले सप्ताह कोलकाता के तिलजला इलाके में एक फैक्ट्री में भीषण आग लगने से दो लोगों की मौत हो गई थी. इसके बाद प्रशासन ने इलाके में अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ अभियान शुरू किया था. प्रशासन की ओर से कई जगहों पर बुलडोजर चलाकर अवैध ढांचों को हटाया गया. पार्क सर्कस में जुटे लोग इसी कार्रवाई का विरोध कर रहे थे. स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन अचानक कार्रवाई कर रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि अवैध निर्माण और सुरक्षा खतरे को देखते हुए कदम उठाना जरूरी है.
सीएम सुरेंद्र अधिकारी ने दी सख्त चेतावनी
घटना के बाद पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुरेंद्र अधिकारी ने सोमवार को साफ कहा कि पुलिस और सुरक्षा बलों पर हमला किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.उन्होंने कहा कि श्रीनगर और कश्मीर में पत्थरबाजी की घटनाएं लगभग खत्म हो चुकी हैं और उन्हें भरोसा है कि बंगाल और कोलकाता में भी इस तरह की घटनाएं बंद होंगी.
मुख्यमंत्री ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर दोबारा ऐसी स्थिति बनी तो प्रशासन और ज्यादा सख्त कार्रवाई करेगा.
ममता बनर्जी ने बुलडोजर राजनीति पर उठाए सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने इस पूरे मामले पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने लिखा कि बंगाल बुलडोजर राजनीति में विश्वास नहीं करता. ममता बनर्जी ने कहा कि टैगोर और नेताजी की धरती पर आम नागरिकों के खिलाफ डर और तोड़फोड़ के जरिए शासन नहीं चलाया जा सकता. उन्होंने आरोप लगाया कि गरीब लोग सरकार की राजनीतिक जिद की कीमत चुका रहे हैं. उन्होंने कहा कि घरों से लेकर फेरी वालों के ठेलों तक पर कार्रवाई हो रही है और जो कुछ हो रहा है वह सीधे गरीबों की जिंदगी पर हमला है. उनके मुताबिक सरकार इंसानों से ज्यादा दिखावे की राजनीति को महत्व दे रही है.
सीपीआई ने भी सरकार को संविधान की याद दिलाई
सीपीआई महासचिव डी राजा ने भी बंगाल की स्थिति पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि राज्य में चुनाव बाद हिंसा और बुलडोजर कार्रवाई लगातार देखने को मिल रही है. डी राजा ने कहा कि चुनाव खत्म हो चुके हैं और सरकार को जनता के जनादेश के अनुसार काम करना चाहिए. उन्होंने बीजेपी पर सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए कहा कि हर कार्रवाई संविधान और संवैधानिक मर्यादाओं के तहत होनी चाहिए.
बीजेपी विधायक ने बुलडोजर कार्रवाई का किया बचाव
हावड़ा में चल रही बुलडोजर कार्रवाई को लेकर बीजेपी विधायक भास्कर भट्टाचार्य ने सरकार का बचाव किया. उन्होंने कहा कि बुलडोजर सिर्फ घरों पर नहीं चलता, बल्कि गलत नीतियों पर भी चलता है.उन्होंने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई टीएमसी की गलत प्रथाओं और अवैध गतिविधियों के खिलाफ हो रही है. उन्होंने कहा कि जो भी कदम उठाए जा रहे हैं, वे कानून के दायरे में रहकर किए जाएंगे.
आसनसोल में भी दो दिन पहले हुआ था बवाल
बंगाल में हाल के दिनों में तनाव की यह पहली घटना नहीं है. इससे दो दिन पहले आसनसोल में भी पुलिस चौकी पर हमला और तोड़फोड़ की घटना सामने आई थी. जानकारी के अनुसार 15 मई की रात लाउडस्पीकर की आवाज कम करने के प्रशासनिक निर्देश के बाद भीड़ और पुलिस के बीच विवाद बढ़ गया था. देखते ही देखते हालात हिंसक हो गए और लोगों ने पुलिस चौकी पर हमला कर दिया. स्थिति को संभालने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े. प्रशासन का कहना था कि राज्य सरकार के निर्देश के तहत कई इलाकों में लाउडस्पीकर की आवाज सीमित रखने को कहा गया था.
लगातार बढ़ रही घटनाओं से प्रशासन पर बढ़ा दबाव
कोलकाता और आसनसोल की घटनाओं ने एक बार फिर बंगाल में कानून व्यवस्था और प्रशासनिक रणनीति पर बहस तेज कर दी है. एक तरफ सरकार अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ सख्ती दिखा रही है, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष इसे बुलडोजर राजनीति और आम लोगों पर दबाव की कार्रवाई बता रहा है. फिलहाल पार्क सर्कस इलाके में स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन लगातार हो रही हिंसक घटनाओं ने प्रशासन और राजनीतिक दलों दोनों की चिंता बढ़ा दी है.